

बलरामपुर: एक अच्छा विद्यालय केवल भवन से नहीं, बल्कि सक्षम प्राचार्य, प्रेरित शिक्षक और सीखने के उत्साह से भरे बच्चों से बनता है। इसी सोच के साथ संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में कलेक्टर चंदन स
ंजय त्रिपाठी की अध्यक्षता एवं जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी की उपस्थिति में मिशन आचार्य विषय पर जिले के प्राचार्यों का प्रशिक्षण सह कार्यशाला एवं संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में कलेक्टर ने प्राचार्यों से सीधे संवाद करते हुए विद्यालयों में बदलाव लाने मिशन आचार्य की विस्तृत कार्य योजना साझा किए।
कार्यशाला में जिले की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए तैयार किए गए मिशन आचार्य के विजन, रणनीति, क्रियान्वयन ढांचे तथा उत्तरदायित्व आधारित कार्य प्रणाली पर विस्तार से चर्चा की गई। जिसमें बताया गया कि मिशन आचार्य जिले में शिक्षा को जनभागीदारी के माध्यम से एक व्यापक सामाजिक जनआंदोलन बनाने की पहल है। जिसके अंतर्गत प्रशासन, शिक्षक, अभिभावक, पंचायतें, जनप्रतिनिधि और समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित की जाएगी।
कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि मिशन आचार्य का लक्ष्य केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों को जीवन के लिए तैयार करना है। प्रत्येक विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार और बेहतर परिणाम लाना सभी की जिम्मेदारी है। कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि आज आवश्यकता केवल विद्यालयों के संचालन की नहीं, बल्कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की है जहाँ प्रत्येक बच्चा अपनी कक्षा के अनुरूप सीख सके, प्रत्येक शिक्षक निरंतर सीखता रहे और प्रत्येक विद्यालय उत्कृष्टता का केंद्र बने। उन्होंने कहा कि मिशन की सफलता बैठकों या गतिविधियों की संख्या से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सीखने के स्तर, विद्यालयों के प्रदर्शन से मापी जाएगी। इसके लिए प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों के आधार पर नियमित समीक्षा, समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई तथा नवाचारों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
कलेक्टर ने कहा कि बचपन जीवन का ऐसा पड़ाव है, जो दोबारा लौटकर नहीं आता। इसलिए प्राचार्य और शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि हर विद्यार्थी को समझना, उसकी क्षमताओं और कमियों की पहचान करना तथा उसके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखना है। उन्होंने कहा कि हमें हर बच्चे का भविष्य बनाना है, इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी की जरूरत के अनुसार उसका मार्गदर्शन करना आवश्यक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि बदलाव की शुरुआत स्वयं से होती है। उन्होंने प्राचार्यों से कहा कि कोई भी प्रयास कभी निष्फल नहीं जाता, इसलिए लगातार सीखते रहें और विद्यार्थियों के हित में निरंतर प्रयास करते रहें। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बच्चों की चुनौतियों को पहचानकर उनका समाधान किया जाए, ताकि विद्यालय उन्हें बोझ नहीं बल्कि सीखने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने का सबसे अच्छा स्थान लगे।
जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि विद्यालय का भविष्य प्राचार्य के नेतृत्व से तय होता है। यदि प्राचार्य स्वयं सीखने और बदलाव के लिए तैयार होगा, तो शिक्षक भी प्रेरित होंगे और उसका सकारात्मक प्रभाव सीधे बच्चों के सीखने पर दिखाई देगा। उन्होंने विस्तार से बताया कि बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि कैसे बढ़ाई जाए, उनकी जिज्ञासा, आत्मविश्वास और रचनात्मक सोच को कैसे विकसित किया जाए तथा प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ाने के लिए विद्यालय स्तर पर क्या-क्या प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का स्तर केवल परीक्षा परिणामों से नहीं बढ़ता, बल्कि कक्षा में होने वाले गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, नियमित शैक्षणिक समीक्षा, नवाचार, शिक्षक मार्गदर्शन और सकारात्मक सीखने के वातावरण से बढ़ता है। उन्होंने कहा कि एक अच्छा शिक्षक कक्षा बदल देता है, लेकिन एक अच्छा प्राचार्य पूरे विद्यालय की तस्वीर बदल देता है। उन्होंने प्राचार्यों से आग्रह किया कि वे स्वयं भी निरंतर सीखें, शिक्षकों का मार्गदर्शन करें और अपने विद्यालय को ऐसा शिक्षण केंद्र बनाएं, जहां हर बच्चा सीखने के लिए उत्साहित रहे।
कार्यशाला में मिशन आचार्य के पाँच प्रमुख स्तंभ - सक्षम विद्यार्थी, सक्षम शिक्षक, सक्षम विद्यालय, सक्षम समाज एवं सक्षम प्रशासन पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही रीडिंग मिशन, होम रीडिंग कार्यक्रम, सामुदायिक पठन अभियान, रेमेडियल लर्निंग, शिक्षक क्षमता संवर्धन, एआई आधारित शिक्षण सहयोग, स्कूल परफॉर्मेंस इंडेक्स तथा रियल-टाइम जिला शिक्षा डैशबोर्ड जैसी नवाचारी पहलों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया।कार्यशाला में उपस्थित सभी अधिकारियों, प्राचार्यों, बीईओ एवं बीआरसी ने मिशन आचार्य को सफल बनाने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्षेत्र में एक आदर्श जिला बनाने के लिए समन्वित प्रयास करने का संकल्प लिया।कार्यशाला में जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव, डीएमसी चन्द्रभूषण गुप्ता, सहित प्राचार्यगण मौजूद रहे।











