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भोपाल। मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना को लेकर अब मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। ग्वालियर की पूर्व कांग्रेस पार्षद सुधा दुबे की ओर से दायर जनहित याचिका में योजना की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे निरस्त करने और महिलाओं को दी जाने वाली मासिक आर्थिक सहायता पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
याचिका सामने आने के बाद योजना के तहत मिलने वाली 1500 रुपये की मासिक सहायता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार फिलहाल कोर्ट ने योजना बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया है। योजना को लेकर राज्य सरकार की ओर से भी निरंतरता का फैसला लिया जा चुका है। अगस्त 2026 में कैबिनेट ने 2026-27 से 2030-31 तक योजना जारी रखने के लिए 1,14,365 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी।
क्या है याचिका में मांग
ग्वालियर के थाटीपुर क्षेत्र की रहने वाली सुधा दुबे ने अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है। इसमें मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा वित्त विभाग के प्रमुख सचिवों को पक्षकार बनाया गया है।याचिका में लाडली बहना योजना को असंवैधानिक बताते हुए इसे तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की मांग की गई है। साथ ही महिलाओं को सीधे नकद राशि दिए जाने पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी की गई है।
पैसे की जगह रोजगार देने का तर्क
याचिकाकर्ता का कहना है कि महिलाओं को हर महीने सीधे राशि देने के बजाय सरकार को रोजगार, कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार इससे महिलाओं को लंबे समय में आत्मनिर्भर बनने के अवसर मिल सकते हैं।याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि केवल आर्थिक सहायता देने से सरकारी मदद पर निर्भरता बढ़ सकती है। याचिकाकर्ता ने योजना के जरिए राशि वितरण को राजनीतिक दृष्टि से भी सवालों के घेरे में रखा है। ये याचिकाकर्ता के तर्क और आरोप हैं, जिन पर अदालत में आगे सुनवाई होनी है।
हाई कोर्ट ने सरकार से क्या कहा
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह आपत्ति उठाई गई कि योजना का लाभ लेने वाली करीब सवा करोड़ महिलाओं को याचिका में पक्षकार नहीं बनाया गया है।इसके बाद हाई कोर्ट ने लाभार्थियों की संख्या को देखते हुए शासन को निर्देश दिया कि वह लाभार्थियों की सूची कोर्ट के समक्ष पेश करे। साथ ही याचिका की प्रति लाभार्थियों तक शासन के माध्यम से पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार को मामले में चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करना है।
1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को मिल रहे 1500 रुपये
मध्य प्रदेश सरकार के 2026-27 के बजट दस्तावेज के अनुसार लाडली बहना योजना में करीब 1 करोड़ 25 लाख महिलाएं पंजीकृत हैं। इन लाभार्थियों को वर्तमान में हर महीने 1500 रुपये की सहायता दी जा रही है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 23,882 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।योजना की मासिक सहायता राशि को नवंबर 2025 से 1250 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये किया गया था।
सरकार ने योजना को आगे जारी रखने का फैसला लिया है
हाई कोर्ट में याचिका की सुनवाई ऐसे समय हो रही है जब राज्य सरकार पहले ही योजना को अगले वर्षों तक जारी रखने का फैसला कर चुकी है। अगस्त 2026 में मध्य प्रदेश कैबिनेट ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक योजना के निरंतर संचालन को मंजूरी दी थी। इसके लिए कुल 1,14,365 करोड़ रुपये के व्यय की स्वीकृति दी गई।इसलिए फिलहाल याचिका का अदालत में आगे क्या रुख रहता है, इस पर नजर रहेगी। कोर्ट के समक्ष सरकार का जवाब और लाभार्थियों से जुड़ी जानकारी पेश होने के बाद मामले में अगली तस्वीर साफ हो सकती है।
मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर साधा निशाना
याचिका को लेकर मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर राजनीतिक निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि योजना को बंद कराने की कोशिश की जा रही है और सरकार लाडली बहना योजना को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।मंत्री ने इसे कांग्रेस की पूर्व पार्षद की ओर से दायर याचिका बताते हुए कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया। हालांकि, यह राजनीतिक प्रतिक्रिया है और योजना की संवैधानिक वैधता से जुड़े सवाल का अंतिम निर्णय अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।




















