

सूरजपुर: सूरजपुर जिले में पदस्थ एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पर लगे भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्ति के आरोपों ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। अधिवक्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता डी.के. सोनी की शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने वर्तमान अपर कलेक्टर जगन्नाथ वर्मा के खिलाफ संयुक्त जांच टीम गठित कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जगन्नाथ वर्मा ने अपने पूर्व पदस्थापना कार्यकाल के दौरान सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में नियमों की अनदेखी करते हुए करोड़ों रुपये की जमीन के सौदे में अनियमितताएं कीं। शिकायत के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग-43 स्थित ग्राम मदनपुर की पुनर्वास भूमि को कथित रूप से प्रभाव का इस्तेमाल कर निजी लोगों के नाम दर्ज कराया गया और बाद में बेनामी तरीके से उसका हस्तांतरण किया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि जमीन की वास्तविक कीमत करीब दो करोड़ रुपये थी, लेकिन दस्तावेजों में कम मूल्य दर्शाकर स्टांप शुल्क में भारी गड़बड़ी की गई। मामले में कई चरणों में नामांतरण और रजिस्ट्री होने की बात भी सामने आई है, जिससे पूरे प्रकरण पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति में जिला पंचायत सीईओ बिजेंद्र सिंह पाटले को अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं एसडीएम शिवानी जायसवाल, शिकायत शाखा प्रभारी सुनील अग्रवाल, भू-अभिलेख अधीक्षक भूपेंद्र कुमारी बंजारे और तहसीलदार सूर्यकांत साथ को सदस्य बनाया गया है। समिति को पूरे मामले की जांच कर जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अधिकारी ने प्रदेश और दूसरे राज्यों में पेट्रोल पंप, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और अन्य संपत्तियों में निवेश किया है। शिकायतकर्ता ने जांच एजेंसी के समक्ष दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने की बात कही है। वहीं अपर कलेक्टर जगन्नाथ वर्मा ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं और वे इस विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करना चाहते। अब पूरे मामले में जांच समिति की रिपोर्ट पर सबकी निगाहें टिकी हैं। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।





















