

नई दिल्ली : राजधानी नई दिल्ली में नगर निगम की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। जानकारी के मुताबिक 29 अप्रैल को मेयर चुनाव कराया जा सकता है। इसी दिन डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमेटी के तीन सदस्यों के लिए भी मतदान होने की संभावना है।
बीजेपी का दावा मजबूत: अपने दम पर जीत का भरोसा
भारतीय जनता पार्टी ने इस बार मेयर चुनाव अपने बलबूते जीतने का दावा किया है। मेयर बनने के लिए 137 वोटों की जरूरत होती है और मौजूदा आंकड़ों के अनुसार पार्टी के पास इससे ज्यादा समर्थन मौजूद बताया जा रहा है।
हालांकि इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी का समर्थन भी भाजपा के साथ है, लेकिन जीत के लिए उस पर निर्भरता जरूरी नहीं मानी जा रही।
स्टैंडिंग कमेटी में खाली सीटों पर भी चुनाव
31 मार्च को हुई स्टैंडिंग कमेटी की बैठक के बाद 18 में से 9 सदस्य रिटायर हो चुके हैं। इनमें 3 सदस्य हाउस से और 6 जोन स्तर से जुड़े थे। अब इन रिक्त पदों को भरने के लिए भी चुनाव प्रक्रिया साथ ही पूरी की जाएगी।
नामांकन जल्द: एक दिन में तीन अहम चुनाव
चुनाव प्रक्रिया को लेकर प्रदेश नेतृत्व से हरी झंडी मिल चुकी है।
संभावना है कि जल्द ही नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी और नामांकन समाप्त होने के बाद 29 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा।
इसी दिन मेयर, डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमेटी के तीन सदस्यों का चुनाव एक साथ होगा।
इस बार खुला मैदान: किसी भी वर्ग से बन सकता है मेयर
MCD के नियमों के अनुसार चौथा और पांचवां साल जनरल कैटेगरी के लिए होता है। इसका मतलब है कि इस बार महिला, पुरुष या अनुसूचित जाति—किसी भी वर्ग से उम्मीदवार मेयर बन सकता है।
विधायकों और सांसदों की भी भूमिका अहम
मेयर चुनाव में केवल पार्षद ही नहीं, बल्कि विधायक और सांसद भी वोटिंग करते हैं। तय फॉर्मूले के अनुसार इस बार भाजपा के 11 और आम आदमी पार्टी के 2 विधायक मतदान में हिस्सा लेंगे।
आंकड़ों का गणित: भाजपा को बढ़त
नगर निगम के कुल 250 पार्षदों में भाजपा के 123, आम आदमी पार्टी के 100, इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के 16 और कांग्रेस के 9 पार्षद हैं।
यदि भाजपा के पार्षदों के साथ उसके विधायक और लोकसभा सांसदों के वोट जोड़े जाएं, तो आंकड़ा करीब 141 तक पहुंचता है, जो जीत के लिए जरूरी संख्या से ज्यादा है।
नजरें 29 अप्रैल पर: बदल सकती है सत्ता की तस्वीर
दिल्ली नगर निगम का यह चुनाव केवल एक पद का नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन का मंच बन चुका है। अब सभी की नजरें 29 अप्रैल पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि राजधानी में नगर निगम की कमान किसके हाथ में जाएगी।

































