

भोपाल। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026 की नई शिक्षक स्थानांतरण नीति जारी कर दी है। नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों के तबादलों की प्रक्रिया जुलाई तक संचालित की जाएगी, जबकि अगले वर्ष से इसे ग्रीष्मावकाश के दौरान ही पूरा करने की योजना है। इस बार नीति में प्रदर्शन, ई-अटेंडेंस और विशेष श्रेणी के कर्मचारियों को प्राथमिकता देने जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।
100 फीसदी रिजल्ट देने वाले शिक्षकों को मिलेगी पहली प्राथमिकता
नई नीति के अनुसार माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं बोर्ड परीक्षा में शत-प्रतिशत परिणाम देने वाले विद्यालयों के प्राचार्य और शिक्षक स्वैच्छिक स्थानांतरण में सबसे पहले पात्र माने जाएंगे। ऐसे शिक्षकों को अपनी पसंद के स्थान पर पदस्थापना के लिए प्राथमिक दावेदारी का अवसर मिलेगा।
ई-अटेंडेंस अब बनेगी तबादले की अहम शर्त
स्कूल शिक्षा विभाग ने स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए ई-अटेंडेंस को अनिवार्य मानदंड बनाया है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान जनवरी से मार्च तक नियमित रूप से ई-अटेंडेंस दर्ज करने वाले शिक्षक ही आवेदन के पात्र होंगे।विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आने वाले वर्षों में पूरे शैक्षणिक सत्र की ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर पात्रता तय की जाएगी। इसका उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है।
तीन साल से पहले नहीं मिलेगा दूसरा स्वैच्छिक तबादला
नई व्यवस्था के तहत जो शिक्षक पिछले तीन वर्षों में स्वैच्छिक स्थानांतरण का लाभ ले चुके हैं, उन्हें सामान्य परिस्थितियों में दोबारा इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा। केवल विशेष या असाधारण परिस्थितियों में ही उनके आवेदन पर विचार किया जाएगा।
इन संस्थानों के शिक्षकों का नहीं होगा तबादला
विभाग ने मॉडल स्कूल, उत्कृष्ट विद्यालय और सांदीपनि विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के स्थानांतरण पर रोक बरकरार रखी है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी स्कूल में शिक्षकों की कमी न हो और कोई संस्था शिक्षक-विहीन न बने।
पारस्परिक तबादले की सुविधा रहेगी जारी
शिक्षकों को ऑनलाइन पारस्परिक स्थानांतरण की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। हालांकि इसके लिए दोनों शिक्षकों का समान पद, विषय, संवर्ग और कैडर में होना अनिवार्य होगा।
इन श्रेणियों को मिलेगी विशेष वरीयता
स्थानांतरण प्रक्रिया में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा निम्न श्रेणियों के शिक्षकों को भी विशेष वरीयता मिलेगी—
- मृतक कर्मचारी के आश्रित
- अतिशेष शिक्षक
- गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षक या उनके परिजन
- पति-पत्नी को एक ही स्थान पर पदस्थापना चाहने वाले कर्मचारी
- दिव्यांग शिक्षक
- विधवा एवं परित्यक्ता महिलाएं
- विधुर शिक्षक
- वरिष्ठता के आधार पर पात्र महिला और पुरुष शिक्षक
ई-अटेंडेंस को लेकर शिक्षक संगठन ने उठाए सवाल
स्थानांतरण पात्रता को ई-अटेंडेंस से जोड़ने पर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल का कहना है कि प्रदेश के कई दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या बनी रहती है। ऐसे में कई शिक्षक नियमित रूप से स्कूल पहुंचने के बावजूद तकनीकी कारणों से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाए।संगठन का तर्क है कि केवल ई-अटेंडेंस के आधार पर तबादले की पात्रता तय करना व्यावहारिक नहीं है और इससे कई योग्य शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं।
नई नीति से क्या बदलेगा?
नई तबादला नीति का उद्देश्य शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना, बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन को प्रोत्साहित करना और स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है। हालांकि ई-अटेंडेंस को लेकर उठे सवालों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि विभाग शिक्षक संगठनों की आपत्तियों पर क्या रुख अपनाता है।





















