सामरी विधायक के अल्टीमेटम से लेकर सीतापुर नायब तहसीलदार विवाद तक, संभाग में क्यों बढ़ रहा टकराव?

अंबिकापुर (अभिषेक कुमार सोनी)।सरगुजा संभाग में पिछले कुछ समय से जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच लगातार बढ़ता टकराव अब राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय बनता जा रहा है।सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव के मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक बहस छेड़ दी है। सीतापुर से बीजेपी विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों पर नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ मारपीट, गाली-गलौज और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में पुलिस ने नायब तहसीलदार की शिकायत पर विधायक समेत लगभग 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। घटना के बाद जिले के प्रशासनिक अमले में भी हलचल देखी जा रही है।

राजस्व कार्यवाही के दौरान हुआ विवाद,नायब तहसीदार से मारपीट के आरोप

जानकारी के अनुसार, घटना 27 मई की शाम राजस्व संबंधी कार्यवाही के दौरान हुई। नायब तहसीलदार तुषार मानिक ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि विधायक रामकुमार टोप्पो अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और राजस्व प्रकरण को लेकर दबाव बनाने लगे। आरोप है कि बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और विधायक समर्थकों द्वारा नायब तहसीलदार के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। पीड़ित अधिकारी का कहना है कि घटना के दौरान उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, धमकी दी गई और उनकी शर्ट तक फाड़ दी गई। बाद में उन्होंने मीडिया के सामने चोट के निशान भी दिखाए।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान एसडीएम फागेश सिन्हा भी मौके पर मौजूद थे। शिकायत के अनुसार, एसडीएम ने स्थिति को संभालने और नायब तहसीलदार को बचाने का प्रयास किया, लेकिन कथित रूप से विधायक समर्थकों ने उन्हें भी वहां से अलग कर दिया। घटना के बाद नायब तहसीलदार तुषार मानिक और एसडीएम फागेश सिन्हा दोनों सीधे कलेक्टर अजीत वसंत से मिलने पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी दी। कलेक्टर ने मामले को गंभीर मानते हुए निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं।

विधायक सहित 10 अन्य पर इन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर

पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की कई धाराएं लगाई गई हैं। इनमें धारा 221 लोक सेवक को उसके कर्तव्य पालन से रोकने या बाधा पहुंचाने से संबंधित है। धारा 121(1) स्वेच्छा से चोट पहुंचाने अथवा मारपीट से जुड़ी धारा मानी जा रही है। वहीं धारा 132 सरकारी कर्मचारी पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग कर शासकीय कार्य में बाधा डालने से संबंधित है। इसके अलावा धारा 191(2) सामूहिक उपद्रव, धमकी और अशांति फैलाने जैसे मामलों से जुड़ी बताई जा रही है। इन धाराओं के तहत मामला दर्ज होने के बाद पुलिस अब दोनों पक्षों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।

हालांकि इस मामले में विधायक पक्ष ने भी अपनी सफाई दी है। विधायक रामकुमार टोप्पो की बड़ी बहन सीमा धनकी ने आरोप लगाया है कि नायब तहसीलदार द्वारा आम लोगों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा था और विवाद की शुरुआत प्रशासनिक रवैये के कारण हुई। उनका कहना है कि विधायक जनता की समस्याओं को लेकर मौके पर पहुंचे थे। विधायक पक्ष ने भी पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि सूत्रों के अनुसार विधायक की बहन की रिपोर्ट पर नायब तहसीलदार तुषार मानिक के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

लगातार बढ़ रही बयानबाजी, विधायक शकुंलता सिंह ने भी अधिकारियों को लगाई फटकार

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच बयानबाजी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। हाल ही में विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने भी सार्वजनिक बयान में अधिकारियों को “एटिट्यूड साइड कर काम करने” की नसीहत दी थी और भूमि प्रकरणों की जड़ में पटवारियों की भूमिका पर सवाल उठाए थे। लगातार सामने आ रहे ऐसे बयान और अब यह विवाद प्रशासनिक व्यवस्था पर दबाव और राजनीतिक हस्तक्षेप की बहस को और तेज कर रहे हैं।

इससे पहले सामरी विधायक उद्देश्वरी पैंकरा द्वारा राजपुर एसडीएम की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए उन्हें हटाने की मांग और 24 घंटे का अल्टीमेटम देना भी क्षेत्र में चर्चा का बड़ा विषय बना था। लगातार सामने आ रहे विवाद यह संकेत दे रहे हैं कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी गहराती जा रही है।

लगातार सामने आ रहे विवाद यह संकेत दे रहे हैं कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी बढ़ती जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे घटनाक्रम सुशासन की छवि को प्रभावित करते हैं और समय रहते संवाद स्थापित नहीं हुआ तो विवाद और गहरा सकते हैं।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि एक नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारी के साथ कथित मारपीट की नौबत आती है, तो निचले स्तर के कर्मचारियों और अधिकारियों का मनोबल प्रभावित होना स्वाभाविक है। दूसरी ओर जनता की समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों का आक्रोश भी लगातार बढ़ता दिखाई देता है। ऐसे में प्रशासन और राजनीति के बीच संवाद की कमी स्पष्ट रूप से नजर आ रही है।

फिलहाल यह मामला केवल एक एफआईआर नहीं, बल्कि प्रशासन और राजनीति के बीच बढ़ते तनाव की बड़ी तस्वीर के रूप में देखा जा रहा है।चूंकि मामला एक विधायक और प्रशासनिक अधिकारी से जुड़ा है, इसलिए जांच की निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण होगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह कानून के राज की परीक्षा होगी। वहीं यदि मामला राजनीतिक या प्रशासनिक तनाव का परिणाम निकला, तो सरकार को संवाद की बेहतर व्यवस्था तैयार करनी होगी।

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