नर्मदापुरम : में किन्नर समाज ने मानवता और संवेदना की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया है। यहां एक लावारिस बच्ची को पाल-पोषकर बड़ा करने के बाद किन्नर समाज ने उसका विवाह पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराया।इस भव्य आयोजन में लाखों रुपये खर्च किए गए और शादी की हर रस्म पूरी श्रद्धा और परंपरा के साथ निभाई गई।

बचपन से अपनाया, मां बनकर दिया जीवन का सहारा

किन्नर नेहा के अनुसार यह बच्ची उन्हें बेहद छोटी उम्र में मिली थी, जब उसके जैविक माता-पिता ने उसे छोड़ दिया था। आज तक उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।इसके बाद किन्नर समाज ने उसे अपनी बेटी मानकर परवरिश की और उसे जीवन की हर सुविधा और संस्कार दिए।गुरु गौरी दीदी के मार्गदर्शन में पूरी परंपरा के साथ उसकी देखभाल की गई और उसे एक मजबूत जीवन देने का प्रयास किया गया।

भव्य विवाह समारोह में उमड़ा जनसैलाब

नर्मदापुरम में आयोजित इस विवाह समारोह में हजारों लोग शामिल हुए। पूरे आयोजन में पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया और किसी भी प्रकार की कमी नहीं छोड़ी गई।समाज ने अपनी क्षमता के अनुसार बेटी के सुखी जीवन के लिए हर संभव व्यवस्था की।

विदाई के समय भावुक हुआ माहौल

जहां एक ओर बेटी के नए जीवन की शुरुआत की खुशी थी, वहीं वर्षों तक उसे मां की तरह पालने वाले किन्नर समाज की आंखें नम हो गईं। विदाई के समय भावनाओं का ऐसा माहौल था जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।

समाजसेवियों ने की सराहना

कार्यक्रम में मौजूद समाजसेवी पंकज शर्मा ने किन्नर समाज के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम मानवता और सामाजिक समरसता का उदाहरण है। इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और रिश्तों की नई परिभाषा भी सामने आती है।

रिश्तों की नई परिभाषा: खून से नहीं, प्यार से बनते हैं बंधन

यह पूरा आयोजन इस बात का संदेश देता है कि रिश्ते केवल जन्म से नहीं बनते, बल्कि प्यार, परवरिश और जिम्मेदारी से भी गहरे और मजबूत हो जाते हैं। नर्मदापुरम की यह घटना समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।

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