
दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ की बहाली को लेकर चल रहा आंदोलन शनिवार को और तेज हो गया। भूख हड़ताल के पांचवें दिन प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुबह तड़के उन्हें परिसर से बाहर कर दिया और इसके बाद सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए। छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के मुताबिक, इस कार्रवाई के चलते छात्रों की कैंपस तक पहुंच और विश्वविद्यालय की जरूरी सुविधाओं का इस्तेमाल प्रभावित हुआ। इसके विरोध में छात्रों ने गेट नंबर 7 के पास जुटकर परिसर को दोबारा खोलने और सामान्य आवाजाही बहाल करने की मांग की।
सुबह 5 बजे छात्रों को हटाने का आरोप
AISA के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 5 बजे छात्र संघ की बहाली के लिए प्रदर्शन कर रहे छात्रों को परिसर से बाहर कर दिया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैंपस के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए और परिसर की गतिविधियों पर रोक लगा दी।
यह घटनाक्रम जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ (JMISU) को फिर से बहाल करने की मांग को लेकर चल रही भूख हड़ताल के पांचवें दिन सामने आया। छात्रों का कहना है कि वे निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि निकाय की बहाली चाहते हैं और इसी मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
गेट नंबर 7 पर जुटे छात्र, परिसर खोलने की मांग
कैंपस में प्रवेश प्रतिबंधित किए जाने के विरोध में छात्र शनिवार दोपहर करीब 3 बजे गेट नंबर 7 के पास एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय परिसर को फिर से खोलने और छात्रों को सामान्य रूप से आने-जाने की अनुमति देने की मांग उठाई।
AISA ने दावा किया कि पुलिस हिरासत और प्रशासन की कथित धमकियों के बावजूद प्रदर्शनकारी दोबारा परिसर में प्रवेश करने में सफल रहे। संगठन के मुताबिक, छात्रों ने इसके बाद भी अपना धरना जारी रखा। हालांकि, इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।
AISA ने प्रशासन की कार्रवाई पर उठाए सवाल
छात्र संगठन ने आरोप लगाया कि प्रशासन छात्र संघ की बहाली की मांग पर बातचीत करने के बजाय आंदोलन को रोकने की कोशिश कर रहा है। AISA का कहना है कि छात्रों की मांगों पर चर्चा की जानी चाहिए और विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस के इस्तेमाल के बजाय संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
AISA के जामिया सचिव सौरभ ने परिसर बंद करने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय छात्रों से ही बनता है, ऐसे में उन्हें परिसर से दूर रखने का निर्णय किस आधार पर लिया गया। उन्होंने प्रशासन से छात्रों के साथ बातचीत शुरू करने और उनकी मांगों पर विचार करने की अपील की।
लाइब्रेरी और कैंटीन तक पहुंच प्रभावित होने का दावा
प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी और कैंटीन जैसी जरूरी सुविधाओं तक पहुंच को लेकर भी चिंता जताई। छात्रों का आरोप है कि प्रवेश पर लगाई गई पाबंदियों का असर केवल आंदोलन में शामिल लोगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्य विद्यार्थियों को भी परेशानी हुई।
AISA ने मांग की कि परिसर को तत्काल खोला जाए और छात्रों को शैक्षणिक सुविधाओं तक बिना बाधा पहुंचने दिया जाए। संगठन ने स्पष्ट किया कि छात्र संघ की बहाली आंदोलन की प्रमुख मांग है और मांगों पर सुनवाई होने तक प्रदर्शन जारी रखा जाएगा।
पांचवें दिन आंदोलन ने पकड़ा जोर
जामिया में छात्र संघ की बहाली को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के दौरान परिसर में प्रवेश और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर टकराव बढ़ने की बात सामने आई है। AISA ने छात्रों को जबरन हटाने, पुलिस हिरासत और कैंपस बंद किए जाने के आरोप लगाए हैं। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
फिलहाल आंदोलन की मुख्य मांग निर्वाचित छात्र संघ की बहाली है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के साथ बातचीत शुरू करता है या नहीं और परिसर में सामान्य गतिविधियां बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।




















