

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंतरधार्मिक विवाह कर साथ रह रहे एक बालिग दंपती को महत्वपूर्ण राहत देते हुए उनके जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बालिग महिला और पुरुष को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने और उसके साथ रहने का पूरा संवैधानिक अधिकार है, जिसे किसी भी स्थिति में बाधित नहीं किया जा सकता।
मामला अंबिकापुर निवासी 26 वर्षीय मोहम्मद जीशान और 25 वर्षीय आन्या सोनी से जुड़ा है। दोनों लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे और विवाह करना चाहते थे, लेकिन अलग-अलग धर्मों से होने के कारण परिवारों ने इस रिश्ते का विरोध किया। बढ़ते विरोध के बीच दोनों ने दिसंबर 2023 में दिल्ली पहुंचकर शाहदरा जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में कानूनी प्रक्रिया के तहत विवाह कर लिया।
याचिका में दंपती ने आरोप लगाया कि शादी के बाद उन्हें परिजनों की ओर से लगातार धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने ऑनर क्राइम की आशंका जताते हुए कहा कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाने का भी डर है। पुलिस से सुरक्षा की मांग करने के बावजूद अपेक्षित मदद नहीं मिलने पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने दलील दी कि धमकियों से जुड़े आरोप सामान्य और अस्पष्ट हैं, इसलिए याचिका पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि जब दो बालिग व्यक्ति अपनी स्वतंत्र इच्छा से विवाह करते हैं, तो उनके निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी को भी उनके निजी जीवन में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
अदालत ने अपने आदेश में Lata Singh vs State of Uttar Pradesh का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं तथा भेदभाव को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
हाईकोर्ट ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि दंपती के जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही यदि भविष्य में किसी प्रकार की शिकायत मिलती है, तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
अदालत ने परिजनों को भी स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि विवाह से असहमति जताना उनका अधिकार हो सकता है, लेकिन धमकी देना, उत्पीड़न करना या हिंसा का सहारा लेना कानूनन स्वीकार्य नहीं है। न्यायालय ने नवविवाहित दंपती के शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करने की चेतावनी भी दी।





















