

नई दिल्ली। देश की राजधानी नई दिल्ली में पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य सेवाओं और केंद्र सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने की, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी शामिल हुए।बैठक में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत बनाने, आयुष्मान भारत योजना के विस्तार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की प्रगति और चिकित्सा ढांचे के आधुनिकीकरण जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
आयुष्मान भारत योजना को जल्द लागू करने पर जोर
बैठक के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने पश्चिम बंगाल में ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ को तेजी से लागू करने पर विशेष जोर दिया। केंद्र सरकार का मानना है कि योजना के लागू होने से राज्य के करीब 1 करोड़ 45 लाख गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को मुफ्त स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल सकेगा।सूत्रों के अनुसार इस दिशा में केंद्र और राज्य सरकार के बीच जल्द ही आधिकारिक एमओयू साइन करने की तैयारी भी चल रही है।
महिलाओं और बच्चों की सेहत पर विशेष फोकस
बैठक में केवल स्वास्थ्य ढांचे तक ही चर्चा सीमित नहीं रही, बल्कि गंभीर बीमारियों की रोकथाम और जनस्वास्थ्य सुधार पर भी विशेष मंथन किया गया।टीबी मुक्त भारत अभियान, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, बच्चों के संपूर्ण टीकाकरण और स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण को लेकर रणनीति तैयार की गई। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान शुरू करने पर भी जोर दिया गया, ताकि महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाया जा सके।
हजारों करोड़ की सहायता और स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार पर चर्चा
बैठक में केंद्र सरकार की ओर से पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए जारी वित्तीय सहायता की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और अन्य केंद्रीय योजनाओं के तहत राज्य को बड़ी राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है।इसके अलावा अस्पतालों के उन्नयन, नई स्वास्थ्य सुविधाओं और आधुनिक चिकित्सा सेवाओं को बढ़ाने को लेकर भी चर्चा हुई।
केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद
बैठक के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में समन्वय और मजबूत होगा। माना जा रहा है कि आने वाले समय में राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी देखने को मिल सकती है।





















