नई दिल्ली। एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से उन्हें किसी भी प्रकार का निजी या आर्थिक लाभ नहीं हुआ है। उनका कहना है कि इस नीति का उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना और किसानों की आय बढ़ाना है।

1.5 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक पहुंचा एथेनॉल ब्लेंडिंग

गडकरी ने बताया कि वर्ष 2014 में देश में एथेनॉल मिश्रण का स्तर केवल 1.5 प्रतिशत था, जिसे बढ़ाकर अब 20 प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंचाया गया है। उनके अनुसार इस पहल से पेट्रोल में आयातित ईंधन की आवश्यकता कम हुई है और देश को करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।

किसानों को मिला बड़ा आर्थिक लाभ

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि फसलों की मांग में वृद्धि हुई है। इससे किसानों को सीधे आर्थिक लाभ मिला है। उन्होंने दावा किया कि इस कार्यक्रम के जरिए लगभग 45 हजार करोड़ रुपये किसानों तक पहुंचे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली और कृषि क्षेत्र में आय के नए अवसर बने।

वाहनों को नुकसान के दावों पर क्या बोले गडकरी?

एथेनॉल मिश्रित ईंधन से वाहनों के खराब होने और माइलेज घटने के आरोपों पर गडकरी ने कहा कि अब तक ऐसा साबित करने वाला कोई वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास एथेनॉल के कारण वाहन खराब होने का प्रमाण है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक तथ्यों के बिना भ्रम फैलाना उचित नहीं है।

कच्चे तेल का आयात घटाना सरकार की प्राथमिकता

गडकरी ने कहा कि भारत हर वर्ष 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में एथेनॉल, बायोफ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग बढ़ने से आयात बिल कम होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और देश ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।

स्वच्छ ईंधनों को बढ़ावा देने पर सरकार का जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार केवल एथेनॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि बायोफ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को भी प्रोत्साहित कर रही है। उनका मानना है कि भविष्य में वैकल्पिक ईंधन देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएंगे।

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