नई दिल्ली : शिवसेना (UBT) के भीतर एक बार फिर बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा है कि पार्टी के लोकसभा सांसदों का एक बड़ा समूह नेतृत्व से अलग राह चुन सकता है। यदि यह घटनाक्रम सच साबित होता है, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए हाल के वर्षों का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।

दिल्ली में अहम बैठक पर टिकी राजनीतिक नजरें

सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद बुधवार सुबह दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाले हैं। यह बैठक शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के आवास पर प्रस्तावित बताई जा रही है, जिसमें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के भी शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इस बैठक ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

छह सांसदों के अलग होने की अटकलों ने बढ़ाई चिंता

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसद अलग गुट बनाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। बताया जा रहा है कि ये सांसद पहले संसद में अलग समूह के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं, जिसके बाद आगे की राजनीतिक रणनीति तय होगी।

स्थापना दिवस से पहले बढ़ा सियासी दबाव

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब शिवसेना अपने 60वें स्थापना दिवस की तैयारियों में जुटी हुई है। ऐसे मौके पर संभावित टूट की खबरें उद्धव ठाकरे खेमे के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। माना जा रहा है कि यदि सांसदों का समूह अलग होता है तो इसका असर पार्टी की राजनीतिक ताकत और संगठनात्मक स्थिति पर पड़ सकता है।

किन सांसदों के नाम चर्चा में हैं

मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, जिन सांसदों के नाम संभावित राजनीतिक बदलाव से जोड़े जा रहे हैं उनमें धाराशिव से ओमराजे निंबालकर, परभणी से संजय जाधव, मुंबई उत्तर-पूर्व से संजय दीना पाटिल, हिंगोली से नागेश पाटिल अष्टिकर, शिरडी से भाऊसाहेब वाकचौरे और यवतमाल-वाशिम से संजय देशमुख शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि इन दावों को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

दिल्ली पहुंचे कई सांसद, बढ़ी अटकलें

सूत्रों का दावा है कि संभावित राजनीतिक बदलाव से जुड़े कुछ सांसद पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। इसी बीच शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता संजय राउत, अरविंद सावंत और अनिल देसाई भी राष्ट्रीय राजधानी में सक्रिय हैं। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व स्थिति को संभालने और किसी भी संभावित विभाजन को रोकने की कोशिश में जुटा हुआ है।

संजय राउत ने लगाए गंभीर आरोप

इस पूरे घटनाक्रम के बीच संजय राउत ने सोशल मीडिया मंच 'X' पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए आर्थिक प्रलोभन दिए जा रहे हैं। राउत ने आरोप लगाया कि सांसदों को बड़ी रकम का प्रस्ताव दिया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में अब तक कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है।

लोकसभा अध्यक्ष को लिखा गया पत्र

संभावित राजनीतिक संकट को देखते हुए शिवसेना (UBT) के लोकसभा नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर पार्टी की आधिकारिक मान्यता बनाए रखने का आग्रह किया है। उन्होंने अनुरोध किया कि पार्टी की बात सुने बिना किसी भी संभावित अलग गुट को मान्यता या विशेषाधिकार न दिया जाए।

महाराष्ट्र की राजनीति में फिर दिख सकता है बड़ा बदलाव

इन घटनाक्रमों ने 2022 में शिवसेना में हुई बड़ी राजनीतिक टूट की यादें फिर ताजा कर दी हैं। यदि सांसदों का कोई समूह वास्तव में अलग रास्ता अपनाता है, तो इसका असर केवल महाराष्ट्र की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संसद में विपक्षी दलों की रणनीति और संख्या बल पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजरें दिल्ली में होने वाली बैठकों और अगले कुछ दिनों में सामने आने वाले राजनीतिक फैसलों पर टिकी हुई हैं।

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