
नई दिल्ली। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित हेराफेरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि इस मामले में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया जा चुका है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को मामले की सुनवाई के दौरान स्थानीय मजिस्ट्रेट की सहायता करने की अनुमति भी दे दी है।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि राम मंदिर में प्राप्त दान राशि की गिनती के दौरान कथित तौर पर गड़बड़ी की गई थी। आरोप है कि रकम की गिनती में शामिल कुछ अधिकारियों ने दान की राशि का एक हिस्सा अपने पास रख लिया। इसके बाद इस रकम को कथित रूप से अन्य जगहों पर निवेश किया गया या फिर अपने बैंक खातों में जमा कराया गया।
मजिस्ट्रेट की कार्यवाही में शामिल हो सकेंगे याचिकाकर्ता
मामले में जनहित को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष चलने वाली न्यायिक कार्यवाही में सहायता करने की अनुमति दी है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता आपराधिक मामलों में पीड़ित पक्ष को मिलने वाली सहायता की तर्ज पर कार्यवाही में सहयोग कर सकेंगे।हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को मजिस्ट्रेट की कार्यवाही में सहायता की अनुमति देने का अर्थ मामले के आरोपों या गुण-दोष पर कोई टिप्पणी करना नहीं है।
अब मजिस्ट्रेट के सामने आगे बढ़ेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिकाओं का निपटारा किए जाने के बाद अब मामले की आगे की कार्यवाही स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष जारी रहेगी। मजिस्ट्रेट उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपों के आधार पर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेंगे। इस मामले में कथित चंदा हेराफेरी के आरोपों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अब निचली अदालत में आगे बढ़ेगी।











