रायपुर/अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों और प्राचीन ताम्रपत्रों से जुड़े मुद्दे पर हुई चर्चा के बाद संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। यदि किसी स्तर पर तथ्यात्मक त्रुटि या लापरवाही सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री अग्रवाल ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, इसलिए वहां प्रस्तुत की जाने वाली प्रत्येक जानकारी तथ्यात्मक और प्रमाणिक होनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी द्वारा अनजाने में या लापरवाहीवश गलत जानकारी दी गई है, तो सरकार पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराएगी और जवाबदेही तय करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी नियमों से ऊपर नहीं है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य किसी ऐतिहासिक तथ्य को विवाद का विषय बनाना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक अध्ययन सुनिश्चित करना है। प्रदेश के प्राचीन मंदिरों, शिलालेखों, ताम्रपत्रों, पांडुलिपियों और अन्य पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों और संबंधित संस्थानों के सहयोग से इन अभिलेखों का दस्तावेजीकरण एवं सत्यापन भी कराया जा रहा है।

मंत्री ने कहा कि किसी भी ऐतिहासिक अभिलेख की भाषा, लिपि और प्रामाणिकता का अंतिम निर्धारण विशेषज्ञों, पुरातत्वविदों और संबंधित संस्थानों के अध्ययन के आधार पर किया जाता है। यदि किसी विषय पर नई जानकारी या मतभेद सामने आते हैं तो सरकार उनका स्वागत करती है और तथ्यों के आधार पर आवश्यक निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है।

राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। पर्यटन स्थलों के विकास, धार्मिक स्थलों के उन्नयन, लोककला एवं लोकसंस्कृति के संरक्षण तथा पुरातात्विक धरोहरों के संवर्धन के लिए कई योजनाओं पर काम चल रहा है।विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों पर उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रश्न पूछना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन हर विषय पर चर्चा तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए। यदि किसी जनप्रतिनिधि या विशेषज्ञ के पास अतिरिक्त दस्तावेज या जानकारी है, तो सरकार उसका परीक्षण कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर पूरे प्रदेश की अमूल्य संपत्ति है और उसका संरक्षण सरकार की नैतिक एवं संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने दोहराया कि यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या गलत जानकारी देने की पुष्टि होती है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बिना पूरे तथ्यों के भ्रम फैलाना प्रदेश के हित में नहीं है। सरकार का लक्ष्य राजनीति नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और सम्मान सुनिश्चित करना है।

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