महाराष्ट्र : राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे और उनके गुट पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने ऐसे संकेत दिए कि आने वाले समय में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट में और राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर उद्धव ठाकरे ने भी अपने भाषण में कई अहम मुद्दों पर जवाब देते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश दिया।

शिंदे का दावा, अभी और होंगे बड़े राजनीतिक घटनाक्रम

एकनाथ शिंदे ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि जो नेता अपने ही साथियों को एकजुट नहीं रख सकता, उसे आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि महायुति सरकार पूरी तरह मजबूत है और विपक्ष के कई नेता उसके संपर्क में हैं। हाल के दिनों में उद्धव गुट के कुछ सांसदों के शिंदे खेमे में जाने की चर्चाओं के बीच उनके इस बयान को राजनीतिक तौर पर काफी अहम माना जा रहा है।

'अभी तो ट्रेलर है, असली फिल्म बाकी है' कहकर दिया बड़ा संकेत

अपने संबोधन में शिंदे ने कहा कि अभी केवल शुरुआत हुई है और आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति केवल ट्रेलर है, जबकि असली घटनाएं अभी बाकी हैं। उनके इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

'शेर' और 'कुत्ते' वाली टिप्पणी से बढ़ा सियासी तापमान

अपने भाषण के दौरान एकनाथ शिंदे ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके सामने एक शेर खड़ा है, जबकि कुछ लोग केवल भौंकने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि कुत्ते झुंड में भौंकते हैं, लेकिन शेर अकेला चलता है। शिकार करते समय भी शेर अपने रास्ते पर रहता है। शिंदे ने दावा किया कि आज की शिवसेना मजबूती के साथ महाराष्ट्र में खड़ी है और आगे भी मजबूत होती जाएगी।

उद्धव ठाकरे का पलटवार, कहा शिवसेना किसी में विलय होने के लिए नहीं बनी

शिंदे के बयान के बाद उद्धव ठाकरे ने भी स्थापना दिवस कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए कहा कि शिवसेना की स्थापना किसी दूसरी पार्टी में विलय होने के लिए नहीं हुई थी। उन्होंने कहा कि यह पार्टी मराठी मानुष के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई लड़ने के उद्देश्य से बनाई गई थी और वही इसकी मूल पहचान है।

कांग्रेस का भी किया जिक्र, पुराने राजनीतिक रिश्तों पर रखी बात

उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में कांग्रेस के साथ पुराने राजनीतिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध जरूर रहा, लेकिन उस दौर में भी कुछ मर्यादाओं का पालन किया जाता था। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन कुछ सीमाओं का सम्मान हमेशा बना रहा।

जरूरत पड़ी तो पद छोड़ने को भी तैयार हूं: उद्धव ठाकरे

अपने भाषण के अंत में उद्धव ठाकरे ने कहा कि यदि पार्टी के लोगों को लगता है कि उन पर लगाए गए आरोप सही हैं, तो वह शिवसेना प्रमुख का पद छोड़ने के लिए भी तैयार हैं। उनके इस बयान को पार्टी कार्यकर्ताओं और महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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