WhatsApp : पाकिस्तान की सेना अब मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को लेकर बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेना अपने अधिकारियों और जवानों को WhatsApp की जगह चीन के मैसेजिंग ऐप WeChat का इस्तेमाल करने के लिए निर्देश दे रही है। हालांकि, इस संबंध में पाकिस्तान सेना की ओर से कोई आधिकारिक सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है।WeChat एक डिजिटल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म है, जिसमें मैसेजिंग के साथ वीडियो कॉल, फाइल शेयरिंग और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। खास बात यह है कि जिस ऐप को पाकिस्तान की सेना अपनाने की तैयारी कर रही है, वह भारत में सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित है।

सेना के अंदर WhatsApp की जगह WeChat लाने की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान सेना ने अपने आंतरिक स्तर पर अधिकारियों और जवानों को WhatsApp का इस्तेमाल धीरे-धीरे कम करने और इसकी जगह WeChat अपनाने के निर्देश दिए हैं।हालांकि अभी तक पाकिस्तान सेना की ओर से कोई सार्वजनिक आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि आने वाले समय में सैन्य संचार के लिए WeChat का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है।

WhatsApp छोड़ने के पीछे बताई जा रही है यह वजह

रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान सेना को आशंका है कि WhatsApp के जरिए निगरानी, डेटा लीक और बातचीत इंटरसेप्ट होने का खतरा हो सकता है। इसी वजह से सेना अपने आंतरिक संचार के लिए दूसरे प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ने की तैयारी कर रही है।WeChat में WhatsApp जैसी कई सुविधाएं मौजूद हैं। इसमें चैटिंग, वीडियो कॉल, फाइल शेयरिंग, डिजिटल पेमेंट और अन्य ऑनलाइन सेवाओं का विकल्प मिलता है। चीन में यह ऐप बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है।

चीन का ऐप है WeChat, भारत में 2020 से प्रतिबंधित

WeChat चीन की कंपनी द्वारा विकसित किया गया ऐप है, जबकि WhatsApp अमेरिकी कंपनी मेटा का प्लेटफॉर्म है। भारत सरकार ने साल 2020 में कई चीनी ऐप्स के साथ WeChat पर भी प्रतिबंध लगाया था।सरकार ने उस समय राष्ट्रीय सुरक्षा और उपयोगकर्ताओं के डेटा की सुरक्षा से जुड़े संभावित जोखिमों को देखते हुए यह कदम उठाया था। इसके बाद भारत में WeChat का इस्तेमाल बंद कर दिया गया।

सुरक्षा और डिजिटल संचार को लेकर बढ़ रही है बहस

पाकिस्तान सेना द्वारा WeChat अपनाने की खबर के बाद एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा, डेटा नियंत्रण और गोपनीयता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सैन्य संगठनों के लिए सुरक्षित संचार व्यवस्था हमेशा महत्वपूर्ण मानी जाती है, इसलिए अलग-अलग देश अपनी जरूरतों के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म चुनते हैं।

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