

छत्तीसगढ़ : नए उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया अब पहले से अधिक सख्त हो गई है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (सीईसीबी) ने उद्योगों के लिए नए 'साइटिंग क्राइटेरिया' यानी स्थान चयन संबंधी मानदंड अधिसूचित कर दिए हैं। नए नियमों के तहत उद्योगों को पर्यावरण और सार्वजनिक हित से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों से न्यूनतम निर्धारित दूरी बनाए रखना अनिवार्य होगा।
पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा प्राथमिकता
नई व्यवस्था के अनुसार उद्योगों की स्थापना नदियों, तालाबों, आबादी, स्कूलों, अस्पतालों, धार्मिक स्थलों, पुरातात्विक स्मारकों, आरक्षित वनों और इको-सेंसिटिव क्षेत्रों के निर्धारित दायरे से बाहर ही की जा सकेगी। यह व्यवस्था वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1981 तथा जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1974 के प्रावधानों के तहत लागू की गई है।
पुराने निर्देशों को मिला कानूनी दर्जा
पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सितंबर 2025 में उद्योगों के लिए न्यूनतम दूरी से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिनमें जून 2026 में संशोधन किया गया। अब इन्हीं संशोधित प्रावधानों को राजपत्र में प्रकाशित कर विधिक मान्यता प्रदान कर दी गई है। भविष्य में नए उद्योगों की पर्यावरणीय स्वीकृति और स्थान चयन का मूल्यांकन इन्हीं मानकों के आधार पर किया जाएगा।
जल स्रोतों से तय की गई न्यूनतम दूरी
नए नियमों के तहत राजस्व अभिलेखों में दर्ज सतही जल स्रोतों, बाढ़ क्षेत्र, हाई फ्लड लेवल और रेड लाइन से उद्योगों की न्यूनतम दूरी तय कर दी गई है।
रेड श्रेणी के उद्योग
- जल स्रोत से कम से कम 500 मीटर दूर।
ऑरेंज श्रेणी के उद्योग
- अपशिष्ट जल उत्पन्न करने वाले उद्योग: कम से कम 75 मीटर।
- अपशिष्ट जल उत्पन्न नहीं करने वाले उद्योग: कम से कम 30 मीटर।
ग्रीन श्रेणी के उद्योग
- न्यूनतम 30 मीटर की दूरी अनिवार्य।
आबादी और सार्वजनिक संस्थानों के लिए भी अलग मानक
रिहायशी क्षेत्रों, स्कूलों, अस्पतालों, धार्मिक स्थलों, पुरातात्विक स्मारकों और इको-सेंसिटिव क्षेत्रों से भी उद्योगों के लिए न्यूनतम दूरी तय की गई है।
- रेड श्रेणी: 500 मीटर।
- ऑरेंज श्रेणी: 200 मीटर।
- ग्रीन श्रेणी: 100 मीटर।
आरक्षित वनों के लिए एक समान नियम
अधिसूचना के अनुसार आरक्षित वन की अधिसूचित सीमा से सभी श्रेणी के उद्योगों को कम से कम 100 मीटर की दूरी बनाए रखना अनिवार्य होगा। यह नियम रेड, ऑरेंज और ग्रीन तीनों श्रेणियों के उद्योगों पर समान रूप से लागू रहेगा।
पर्यावरणीय विवादों में आ सकती है कमी
सरकार का मानना है कि नए मानकों के लागू होने से जल स्रोतों और घनी आबादी के निकट प्रदूषणकारी उद्योगों की स्थापना पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। साथ ही उद्योगों के स्थान चयन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और एकरूप बनेगी, जिससे भविष्य में पर्यावरणीय विवाद और स्थानीय स्तर पर होने वाले विरोध की संभावनाएं भी कम होंगी।










