

सूरजपुर: संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा, अम्बिकापुर द्वारा विश्रामपुर निवासी रुक्मिणी पाल को "भारत की विभीषिका और हिन्दी उपन्यास (स्त्री जीवन के विशेष संदर्भ में)" विषय पर पी-एच.डी. की उपाधि प्रदान की गई है। इस उपलब्धि के साथ ही वे अब डॉ. रुक्मिणी पाल के नाम से पहचानी जाएँगी। उनकी इस सफलता पर क्षेत्र में हर्ष का माहौल है तथा परिजनों, शिक्षाविदों एवं शुभचिंतकों की ओर से बधाइयों का तांता लगा हुआ है।रुक्मिणी पाल ने यह शोध ग्रंथ शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय मनेन्द्रगढ़ एवं शासकीय नवीन महाविद्यालय नागपुर के प्राचार्य डॉ. रामकिंकर पांडेय के शोध निदेशन में पूर्ण किया। अपने शोध में उन्होंने हिन्दी उपन्यास साहित्य में भारत की विभीषिका के चित्रण का, विशेष रूप से स्त्री जीवन के संदर्भ में, गहन अध्ययन एवं विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
उल्लेखनीय है कि साहित्य के इस संवेदनशील एवं गंभीर विषय पर किया गया यह शोध कार्य नारी जीवन के संघर्षों और अनुभवों को साहित्यिक दृष्टि से समझने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है। रुक्मिणी पाल की इस शैक्षणिक उपलब्धि से क्षेत्र का गौरव बढ़ा है तथा यह सफलता अन्य शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी है।











