
रायपुर। नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस आपदा में अब तक 734 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि तिब्बत में भी 16 लोगों की जान जा चुकी है। 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की भी है। इस बीच रायपुर के पांच दोस्तों की कहानी सामने आई है, जो नेपाल में फंसे बिना सुरक्षित अपने घर लौट आए।
माना कैंप निवासी दिनेश सिंह ठाकुर, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, नारायण सेन और यतेंद्र प्रकाश 21 अगस्त को धार्मिक यात्रा के लिए नेपाल गए थे। शनिवार को जब वे रायपुर लौटे तो दोस्तों ने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वे नेपाल से दूसरी जिंदगी लेकर वापस आए हों।
रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही उन्होंने जमीन पर माथा टेककर मातृभूमि की मिट्टी को प्रणाम किया। उनके लिए यह यात्रा धार्मिक अनुभव के साथ जिंदगी और मौत के बेहद करीब पहुंचने वाली घटना भी बन गई।
चाय के लिए रुके 10 से 15 मिनट और बच गई जान
दोस्तों के मुताबिक उनकी जिंदगी बचाने में एक छोटा सा ब्रेक अहम साबित हुआ। वे मुक्तिनाथ से पोखरा होते हुए वापस लौट रहे थे। सुबह करीब 9:30 बजे धड़िंग जिले के मलेखू कस्बे में उन्हें चाय पीने की इच्छा हुई।
सड़क किनारे होटल देखकर उन्होंने वाहन रोक दिया। चाय पीने और वहां कुछ समय रुकने में करीब 10 से 15 मिनट लग गए। इसी दौरान हालात तेजी से बदलने लगे और आसपास की घाटियों से पानी का बहाव बढ़ने लगा।
दोस्तों का कहना है कि यदि वे कुछ मिनट पहले वहां से निकल गए होते तो संभव है कि उनका वाहन भी अचानक आए तेज पानी की चपेट में आ जाता।
आगे पुल बहने की मिली जानकारी
चाय पीने के कुछ देर बाद उन्हें पता चला कि आगे एक पुल पानी के तेज बहाव में बह चुका है। इसके बाद उन्होंने त्रिशूली नदी का भयावह रूप अपनी आंखों से देखा।
तेज धारा में कारें, सामान और दूसरी चीजें बहती नजर आ रही थीं। कई स्थानों पर पानी का स्तर तेजी से ऊपर बढ़ रहा था। इस दृश्य ने दोस्तों को एहसास कराया कि कुछ मिनट पहले लिया गया उनका छोटा सा फैसला कितना महत्वपूर्ण साबित हुआ।
26 अगस्त की बाढ़ ने नेपाल में मचाई तबाही
नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद कई इलाकों में स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई लोग अब तक लापता बताए जा रहे हैं।
बाढ़ का असर हाइड्रोपावर परियोजनाओं तक भी पहुंचा है। अलग-अलग परियोजनाओं की टनल में कई कर्मचारी फंसे हुए हैं। जानकारी के मुताबिक करीब 898 कर्मचारी लापता बताए गए थे, जिनमें से लगभग 361 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
नेपाल की सेना प्रभावित इलाकों में लगातार खोज और बचाव अभियान चला रही है। वहीं भारत की ओर से भी राहत सामग्री और बचाव अभियान के लिए सहायता भेजी गई है।
रायपुर लौटे दोस्तों ने बताई आपदा की भयावहता
नेपाल से लौटे पांचों दोस्तों के लिए यह यात्रा ऐसी याद बन गई है, जिसे वे शायद कभी नहीं भूल पाएंगे। धार्मिक यात्रा पर निकले इन दोस्तों ने जिस समय नेपाल छोड़ा, उसके कुछ ही देर बाद हालात इतने तेजी से बिगड़े कि सामान्य सफर जिंदगी बचाने की दौड़ में बदल गया।
उनका कहना है कि मलेखू में चाय के लिए लिया गया छोटा सा ब्रेक उनके लिए महज संयोग नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने वाला फैसला साबित हुआ।




















