

तमिलनाडु : राजनीतिक हालात एक बार फिर गरमा गए हैं। हाल ही में विजय सरकार के गठन और 10 मई 2026 को नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच पूर्व डिप्टी सीएम और डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन के एक नए बयान ने विवाद को फिर हवा दे दी है।
विधानसभा में बयान से फिर भड़की सियासी आग: सनातन को लेकर टिप्पणी पर विवाद
नई विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में संबोधित करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर सनातन धर्म को लेकर अपनी पुरानी टिप्पणी दोहराई। उन्होंने कहा कि जो व्यवस्था समाज में भेदभाव पैदा करती है, उसे खत्म किया जाना चाहिए।इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है। विपक्षी दलों ने इसे आस्था पर हमला बताया है, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे गंभीर और आपत्तिजनक करार दिया है।
शपथ समारोह से शुरू हुआ विवाद, वंदे मातरम पर भी उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, उदयनिधि स्टालिन ने पहले भी शपथ ग्रहण समारोह के दौरान वंदे मातरम गाए जाने पर आपत्ति जताई थी। इसे लेकर पहले ही राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ चुकी थी, और अब नए बयान ने विवाद को और गहरा कर दिया है।
2023 का बयान फिर चर्चा में: डेंगू-मलेरिया से तुलना पर मचा था बवाल
यह पहला मौका नहीं है जब उदयनिधि स्टालिन अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में आए हों। वर्ष 2023 में चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से की थी।उनके इस बयान के बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। मामला इतना बढ़ा कि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में इस टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जताई थी।
भाजपा का पलटवार: अमित मालवीय ने जताई तीखी प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद पर भाजपा की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले भी ऐसे बयानों को अदालत ने हेट स्पीच माना था और जनता ने इसका जवाब चुनावों में दिया था।उन्होंने यह भी कहा कि आस्था से जुड़े विषयों पर टिप्पणी करना केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं बल्कि गंभीर सामाजिक संवेदनशीलता का मामला है।
तमिलनाडु में सियासी तापमान चरम पर: बयान बन रहे हैं टकराव की वजह
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद पहले ही राजनीतिक माहौल संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में लगातार सामने आ रहे बयान अब सियासी टकराव को और बढ़ा रहे हैं।विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जिससे तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गई है।
निष्कर्ष: बयान और राजनीति के बीच बढ़ती दूरी या गहराता टकराव?
तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के साथ जहां नई उम्मीदें देखी जा रही थीं, वहीं लगातार विवादित बयानों ने राजनीतिक माहौल को और जटिल बना दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और कितना तूल पकड़ेगा, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।





















