लखनऊ। राजधानी के चर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड मामले में अदालत ने बर्खास्त सिपाही प्रशांत कुमार चौधरी को 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 304 पार्ट-2 के तहत गैर इरादतन हत्या का दोषी माना था। कोर्ट ने आरोपी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।प्रशांत चौधरी इस मामले में करीब आठ साल से जेल में बंद है। सजा सुनाए जाने से पहले उसने अदालत से कम सजा देने की अपील की थी और अपनी पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला दिया था। हालांकि अदालत ने उसे 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।

अदालत से बोला आरोपी, परिवार की स्थिति को देखते हुए बरती जाए नरमी

सजा के मुद्दे पर हुई सुनवाई के दौरान प्रशांत कुमार चौधरी ने अदालत से राहत देने की मांग की। उसने बताया कि उसके वृद्ध माता-पिता हैं और परिवार में उसका भाई भी अभी अविवाहित है। आरोपी ने यह भी कहा कि उसका इससे पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है।प्रशांत ने अदालत को बताया कि वह करीब आठ साल से जेल में है। उसने जेल में बिताई गई अवधि को ही पर्याप्त सजा मानने की अपील की। उसने अपनी उम्र 36 वर्ष बताते हुए कहा कि इस मुकदमे के चलते उसका पारिवारिक जीवन भी प्रभावित हुआ है।

तलाक और परिवार की जिम्मेदारियों का दिया हवाला

प्रशांत ने अपनी निजी परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उसके मुताबिक उसकी पत्नी ने वर्ष 2023 में उसे तलाक दे दिया था। घर में बुजुर्ग माता-पिता हैं और भाई की शादी भी नहीं हुई है।इन परिस्थितियों को आधार बनाकर उसने अदालत से सजा में नरमी बरतने की मांग की। हालांकि पीड़ित परिवार की ओर से पेश अधिवक्ता प्रांशु अग्रवाल ने आरोपी की दलीलों का विरोध किया और अदालत से कड़ी सजा देने का अनुरोध किया।

हत्या नहीं, गैर इरादतन हत्या का दोषी माना गया

इस मामले में अदालत ने प्रशांत चौधरी को हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या का दोषी माना। उसे IPC की धारा 304 पार्ट-2 के तहत दोषी ठहराया गया था।इस प्रावधान के तहत ऐसे मामलों पर विचार किया जाता है, जहां आरोपी के कृत्य से मौत होने की जानकारी होने के बावजूद हत्या का स्पष्ट इरादा साबित नहीं होता। मामले में सह-आरोपी सिपाही संदीप कुमार को अदालत ने बरी कर दिया था।

29 सितंबर 2018 की रात क्या हुआ था?

यह मामला 29 सितंबर 2018 का है। एप्पल कंपनी में काम करने वाले 38 वर्षीय विवेक तिवारी देर रात अपनी महिला सहकर्मी को घर छोड़ने जा रहे थे। इसी दौरान लखनऊ में पुलिस गश्त के दौरान उनकी कार को रोकने का प्रयास किया गया।इसी घटनाक्रम के दौरान तत्कालीन सिपाही प्रशांत चौधरी ने गोली चला दी। गोली विवेक तिवारी को लगी और इसके बाद उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। गंभीर रूप से घायल विवेक तिवारी की बाद में मौत हो गई थी।

घटना के बाद पूरे प्रदेश में हुई थी चर्चा

विवेक तिवारी की मौत के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। मामले ने प्रदेश स्तर पर व्यापक चर्चा का रूप लिया और विवेक के परिवार की ओर से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।घटना के बाद प्रशांत चौधरी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हुई और मामला लंबे समय तक अदालत में चलता रहा। अब करीब आठ वर्ष बाद अदालत ने दोषी को 10 साल के कारावास और 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

आठ साल जेल में रह चुका है आरोपी, आगे क्या होगा?

प्रशांत चौधरी पहले ही करीब आठ साल जेल में गुजार चुका है। आम तौर पर न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि को सजा की अवधि में समायोजित किए जाने का प्रावधान होता है। ऐसे में अंतिम रूप से कितनी अवधि शेष रहेगी, यह जेल रिकॉर्ड और लागू कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।वहीं दोषी के पास अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करने का कानूनी विकल्प भी मौजूद है।

परिवार ने फैसले पर जताई असंतुष्टि, हाई कोर्ट जाने की तैयारी

अदालत के फैसले के बाद विवेक तिवारी का परिवार पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। परिवार की आपत्ति मुख्य रूप से प्रशांत चौधरी को हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराए जाने और सह-आरोपी सिपाही संदीप कुमार के बरी होने को लेकर है।परिवार की ओर से संकेत दिया गया है कि विस्तृत फैसला देखने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में करीब आठ साल पुराने इस मामले में निचली अदालत के फैसले के बाद अब उच्च न्यायालय में चुनौती की संभावना भी बनी हुई है।

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