नई दिल्ली। ओमान के निकट स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए मिसाइल हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। हमले में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया, जिसमें कार्यरत एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। घटना के बाद भारत सरकार ने नई दिल्ली में ईरान के वरिष्ठ राजनयिक को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया।

विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिक की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच होनी चाहिए। मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार ने मृतक नाविक के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए हरसंभव सहायता का भरोसा भी दिया।

होर्मुज जलडमरूमध्य में हुआ हमला

जानकारी के अनुसार, हमला उस समय हुआ जब दोनों तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त व्यापारिक रास्तों में शामिल है। खाड़ी देशों से निर्यात होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से विभिन्न देशों तक पहुंचता है। ऐसे में यहां होने वाली किसी भी सैन्य घटना का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।

पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव बना चिंता का कारण

हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में समुद्री जहाजों पर हमलों, ड्रोन और मिसाइल घटनाओं के चलते क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ा है। इससे समुद्री सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता गहराई है।

भारत के बड़ी संख्या में नागरिक और हजारों नाविक खाड़ी देशों में कार्यरत हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं भारत के लिए भी गंभीर चिंता का विषय हैं।

स्थिति पर नजर बनाए हुए है भारत

विदेश मंत्रालय ने बताया कि सरकार पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है। भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है, ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जानकारी जुटाई जा सके। साथ ही क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों और समुद्री कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

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