

पंजाब : हरियाणा हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए साफ किया है कि शादी के बाद पूर्व साथी से मुलाकात को अपने आप में गलत या अपराध नहीं माना जा सकता। यह मामला तलाक की कार्यवाही से जुड़ा हुआ था, जिसमें पति ने पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए थे।
2021 की शादी, जल्द ही शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, यह दंपती वर्ष 2021 में विवाह बंधन में बंधा था, लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच मतभेद और विवाद बढ़ने लगे। स्थिति इतनी बिगड़ी कि मामला फैमिली कोर्ट तक पहुंच गया और तलाक की याचिका दायर कर दी गई।
पति ने लगाए पूर्व संबंध और मुलाकात के आरोप
सुनवाई के दौरान पति ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी का शादी से पहले एक व्यक्ति के साथ संबंध था और शादी के बाद भी वह उससे मिलती रही। पति ने यह भी दावा किया कि पत्नी को आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया था।
पत्नी की ओर से भी ससुराल पर गंभीर आरोप
दूसरी ओर पत्नी ने भी पति और उसके परिवार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराईं, जिससे मामला और जटिल हो गया।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी: एक मुलाकात से नहीं बनता व्यभिचार
हाईकोर्ट की जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस रमेश कुमार की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि केवल एक बार की मुलाकात के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि कोई व्यक्ति निरंतर अवैध संबंध में है।कोर्ट ने कहा कि शादी से पहले के संबंधों को शादी के बाद व्यभिचार मानने के लिए लगातार और दोहराए गए संबंधों के स्पष्ट प्रमाण जरूरी होते हैं।
पत्नी के आरोपों पर भी कोर्ट सख्त
कोर्ट ने पत्नी द्वारा ससुराल पक्ष पर लगाए गए आरोपों को बिना ठोस सबूत के गंभीर बताया और कहा कि इस तरह के आरोप किसी व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।




















