

अम्बिकेश गुप्ता
कुसमी/बलरामपुर। जिला के कोरंधा थाना अंतर्गत ग्राम हंसपुर में हुवे रामनरेश हत्याकांड को लेकर 16 फरवरी 2026 को शासन को भेजी गई कलेक्टर की आधिकारिक रिपोर्ट ने उक्त मामले में कई अहम तथ्यों को सामने रखा है. लेकिन अब उसी रिपोर्ट के एक हिस्से ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि घटना के बाद हत्या के आरोपित और वर्तमान में निलंबित एसडीएम करुण डहरिया ने अपने “कार्यालयीन कर्मचारी” मनीष सिन्हा को लैपटॉप लेकर बुलवाया था, ताकि प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई की जा सके।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर उस रात ऐसी कौन-सी परिस्थिति थी कि एसडीएम ने राजस्व विभाग के नियमित कर्मचारियों, रीडर या नायब तहसीलदार की जगह एक शिक्षक को बुलवाना उचित समझा?
कलेक्टर कार्यालय से शासन को भेजे गए प्रतिवेदन के अनुसार, घटना के बाद रात लगभग 10:30 बजे घायल व्यक्तियों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुसमी में भर्ती कराया गया। इसके बाद एसडीएम करुण डहरिया द्वारा “कार्यालयीन कर्मचारी” मनीष सिन्हा को लैपटॉप के साथ बुलाया गया, ताकि प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया की जा सके। हालांकि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि देर रात होने के कारण कार्यवाही अगली सुबह करने की बात कहते हुए सभी वापस चले गए।
घटनाक्रम पर गंभीर संदेह, शिक्षक होकर भी एसडीएम कार्यालय में वर्षों तक संलग्न
चर्चाओं का केंद्र बने मनीष सिन्हा कोई नियमित राजस्व कर्मचारी नहीं थे, बल्कि शिक्षा विभाग में शिक्षक पद पर पदस्थ बताए जाते हैं। आरोप है कि उन्हें लंबे समय से नियम विरुद्ध तरीके से एसडीएम कार्यालय में संलग्न रखा गया था। शिकायतों के बाद कमिश्नर स्तर से कार्रवाई हुई और अंततः उन्हें मूल पदस्थापना में वापस भेजा गया, लेकिन यह आदेश भी तब प्रभावी हुआ जब करुण डहरिया हत्या के मामले में गिरफ्तार होकर जेल भेजे जा चुके थे। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर एसडीएम करुण डहरिया को अपने ही विभागीय अमले की बजाय एक शिक्षक पर इतना भरोसा क्यों था? क्या राजस्व कर्मचारियों और रीडर को किनारे रखकर कुछ विशेष तरीके से दस्तावेजी कार्रवाई की जा रही थी? या फिर उस रात किसी विशेष “प्लानिंग” को अंजाम देने का प्रयास चल रहा था?
काली कमाई और प्रभावशाली भूमिका की चर्चाएं
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह चर्चा रही है कि मनीष सिन्हा एसडीएम कार्यालय में रहकर सिर्फ प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं थे, बल्कि एसडीएम कार्यालय के प्रभावशाली संचालन और कथित आर्थिक गतिविधियों में भी उनकी सक्रिय भूमिका थी। आरोप यह भी लगते रहे हैं कि उन्होंने एसडीएम कार्यालय में रहते हुए अपने प्रभाव का उपयोग कर भारी आर्थिक लाभ अर्जित किया। जिस प्रकार हत्या जैसे गंभीर मामले की रात उन्हें तत्काल बुलवाया गया, उससे इन चर्चाओं को और बल मिल रहा है।
प्रशासनिक जांच के दौरान भी कैमरे में कैद
ध्यान रहें कि 16 फरवरी 2026 को शासन को भेजी गई प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद जब अलग से प्रशासनिक जांच की प्रक्रिया शुरू हुई, उसी दौरान 11 अप्रैल 2026 को मनीष सिन्हा को अपनी स्कूटी से एसडीएम कार्यालय आते - जाते कैमरे में कैद किया गया था। जिसकी समाचार पत्र व पोर्टल पर भी खबर प्रकाशित हुई थी। इस घटनाक्रम ने भी कई सवाल खड़े कर दिए थे कि आखिर एक शिक्षक, जिसे मूल विभाग में वापस भेजे जाने की प्रक्रिया चल रही थी, वह प्रशासनिक जांच के दौरान लगातार एसडीएम कार्यालय से किस भूमिका में जुड़ा हुआ था?
अब उठ रहे बड़े सवाल
क्या हत्या कांड के बाद दस्तावेजी रणनीति तैयार करने का प्रयास किया जा रहा था? आखिर राजस्व विभाग के कर्मचारियों की बजाय शिक्षक मनीष सिन्हा को ही क्यों बुलाया गया? क्या प्रशासनिक जांच और पुलिस विवेचना को प्रभावित करने की कोई समानांतर कोशिश चल रही थी? क्या शासन अब शिक्षक की भूमिका की भी अलग से जांच कराएगा?
हंसपुर रामनरेश हत्याकांड में पहले ही पुलिस द्वारा करुण डहरिया सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या समेत गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज किया जा चुका है। अब निगाहें इस बात पर भी टिक गई हैं कि जांच एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम में मनीष सिन्हा की भूमिका को किस नजरिए से देखती हैं।





















