

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 26 दिन लंबे अनशन के समाप्त होने के पीछे कई दौर की बातचीत और राजनीतिक स्तर पर हुए प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार और वांगचुक के बीच संवाद स्थापित करने में कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने अहम भूमिका निभाई। बताया जा रहा है कि तन्खा लंबे समय से वांगचुक के करीबी रहे हैं और पहले भी विभिन्न कानूनी मामलों में उनका सहयोग कर चुके हैं।
स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद तेज हुई बातचीत
अनशन के दौरान वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ने लगी थी, जिसके बाद सरकार की ओर से बातचीत की प्रक्रिया तेज कर दी गई। इसी दौरान वांगचुक ने अपनी प्रमुख मांगों को लिखित रूप में सरकार के समक्ष रखा।इन मांगों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल युवाओं के खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने और उनकी चिंताओं पर गंभीरता से विचार करने की अपेक्षा प्रमुख रूप से शामिल थी।
केंद्रीय मंत्रियों ने अस्पताल पहुंचकर की मुलाकात
मांगों पर चर्चा के बाद केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह अस्पताल पहुंचे और सोनम वांगचुक से मुलाकात की। बातचीत के दौरान उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी ओर से उठाए गए मुद्दों पर उचित स्तर पर विचार किया जाएगा और संबंधित विषयों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।सरकार की ओर से मिले इस भरोसे के बाद समाधान का रास्ता खुला और सकारात्मक माहौल बनने लगा।
सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने भी की अपील
इसी बीच विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल भी वांगचुक से मिलने पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने उनसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और अनशन समाप्त करने की अपील की।सांसदों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार से जुड़े मुद्दे अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुके हैं और इन मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से आगे भी उठाया जा सकता है।
लद्दाख के प्रतिनिधियों ने भी निभाई अहम भूमिका
अनशन समाप्त कराने की कोशिशों में लद्दाख से आए सामाजिक और सामुदायिक प्रतिनिधियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कई बार वांगचुक से मुलाकात कर स्वास्थ्य का ध्यान रखने और अनशन समाप्त करने का आग्रह किया।कई चरणों में चली बातचीत और सरकार की ओर से मिले लिखित आश्वासन के बाद वांगचुक ने अपना 26 दिन लंबा अनशन समाप्त करने का फैसला लिया।
आंदोलन जारी रखने का किया संकेत
अनशन खत्म करने के बाद सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि यह उनके अभियान का अंत नहीं है। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल स्वास्थ्य और आगे की रणनीति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उनके अनुसार, जवाबदेही सुनिश्चित करने और अपनी मांगों को आगे बढ़ाने का प्रयास लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।











