मध्य प्रदेश। बदलते समय के साथ शिक्षा का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। अब स्कूल सिर्फ किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। सागर जिले के कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों को तकनीकी और व्यावसायिक कौशल सिखाने की पहल शुरू हुई है, जो उन्हें भविष्य में रोजगार के लिए तैयार करेगी।

स्कूल में ही सीख रहे वाहन सुधारने की तकनीक
नई शिक्षा नीति के तहत शुरू इस पहल में छात्रों को बाइक और अन्य वाहनों की बेसिक रिपेयरिंग सिखाई जा रही है। बच्चे अब यह समझ रहे हैं कि इंजन कैसे काम करता है, छोटी खराबियों को कैसे ठीक किया जाता है और वाहन के प्रमुख पार्ट्स की पहचान कैसे की जाती है। इसके साथ ही कंप्यूटर और आईटी से जुड़ी जरूरी जानकारी भी दी जा रही है।

9वीं से 12वीं तक के छात्रों को मिल रही ट्रेनिंग
इस योजना के तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को अलग-अलग ट्रेड में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसमें ऑटोमोबाइल, आईटी, इलेक्ट्रिकल जैसे विषय शामिल हैं। स्कूलों में समय-समय पर विशेषज्ञ पहुंचकर छात्रों को प्रैक्टिकल तरीके से सिखा रहे हैं, जिससे सीखने की प्रक्रिया और प्रभावी हो रही है।

ग्रामीण छात्रों के लिए नए अवसर, आत्मनिर्भर बनने की राह आसान
इस पहल का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण और सामान्य परिवारों के बच्चों को मिल रहा है। पढ़ाई के साथ कौशल सीखने से वे आगे चलकर नौकरी पाने या खुद का काम शुरू करने के लिए सक्षम बन सकेंगे। यह मॉडल उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है।

अब सिर्फ डिग्री नहीं, स्किल भी जरूरी
शिक्षकों का मानना है कि आज के दौर में केवल डिग्री काफी नहीं है। हर छात्र के पास कोई न कोई व्यावहारिक कौशल होना जरूरी है। इसी सोच के साथ यह पहल शुरू की गई है, ताकि छात्र पढ़ाई के साथ-साथ जीवन में उपयोगी हुनर भी हासिल कर सकें।

आने वाले समय में और स्कूलों तक पहुंचेगी पहल
सरकार का फोकस अब ऐसी शिक्षा व्यवस्था पर है, जो सीधे रोजगार से जुड़ी हो। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में प्रदेश के अन्य स्कूलों में भी इस तरह के व्यावसायिक कोर्स शुरू किए जाएंगे, जिससे ज्यादा से ज्यादा छात्र इसका लाभ उठा सकें।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!