

रायगढ़: सड़क सुरक्षा को लेकर रायगढ़ पुलिस और परिवहन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जाने के मामले की जांच तेज कर दी है। शिकायत मिलने पर पुलिस और आरटीओ की संयुक्त टीम ने स्थानीय बाबा ट्रेवल्स में दबिश देकर दस्तावेजों की जांच शुरू की है।
जानकारी के अनुसार, कुछ बाहरी राज्यों के निवासियों को रायगढ़ का निवासी दर्शाकर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की शिकायत पुलिस को प्राप्त हुई थी। आरोप है कि एजेंसी द्वारा फर्जी किरायानामा और शपथ-पत्र तैयार कर आवेदकों को स्थानीय निवासी दिखाते हुए लाइसेंस के लिए आवेदन कराया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा और यातायात उप पुलिस अधीक्षक उत्तम प्रताप सिंह के नेतृत्व में आरटीओ एवं यातायात पुलिस की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में कई आवेदकों के पते एक जैसे पाए गए हैं, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका और गहरा गई है।जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में ड्राइविंग टेस्ट के लिए वास्तविक आवेदक के स्थान पर अन्य व्यक्तियों को शामिल कर लाइसेंस जारी कराए जाने की संभावना है। फिलहाल करीब 180 लाइसेंसधारियों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।
पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा निवास प्रमाण पत्र, आवेदन दस्तावेजों और लाइसेंस प्रक्रिया से जुड़े अभिलेखों की बारीकी से जांच की जा रही है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या फर्जी दस्तावेजों के उपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों और एजेंसियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि "सड़क सुरक्षा से जुड़ी प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस बनवाने और उनका उपयोग करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।"इस कार्रवाई को सड़क सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और भारी वाहनों के संचालन में फर्जी लाइसेंस के इस्तेमाल पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





















