नई दिल्ली: NEET UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI की जांच अब अहम चरण में पहुंच गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने शुक्रवार को CBI की ओर से दाखिल आरोपपत्र पर एजेंसी की दलीलें सुनीं। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के फैसले के लिए 10 अगस्त की तारीख तय की है।CBI ने इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ करीब 20 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट

CBI की ओर से दाखिल आरोपपत्र में मनीषा मंधारे, मनीषा वाघमारे, मनीषा संजय हवलदार, यश यादव, प्रहलाद कुलकर्णी, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, डॉ. मनोज शिरुरे, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, हर्षद जयेश शाह, मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल को आरोपी बनाया गया है।विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश अजय गुप्ता ने CBI की ओर से पेश वरिष्ठ लोक अभियोजक वीके पाठक और लोक अभियोजक अर्जुन आनंद की दलीलें सुनीं।

CBI ने बताया कैसे सामने आया पेपर लीक मामला

जांच एजेंसी के अनुसार, NEET UG 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर 12 मई 2026 को शिकायत मिलने के बाद FIR दर्ज की गई थी।CBI ने बताया कि व्हिसलब्लोअर शशिकांत सुथार को लीक हुआ प्रश्नपत्र मिलने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।एजेंसी का दावा है कि लीक प्रश्नपत्र यश यादव, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे और मनीषा वाघमारे के जरिए मांगीलाल बिवाल और विकास बिवाल तक पहुंचा।

NTA विशेषज्ञों पर भी लगाए गए गंभीर आरोप

CBI ने आरोप लगाया कि मनीषा संजय वाघमारे ने परीक्षा के लिए नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञों मनीषा मंधारे, पीवी कुलकर्णी और मनीषा संजय हवलदार से प्रश्नपत्र हासिल किए।इन विशेषज्ञों को NTA की ओर से प्रश्न तैयार करने, अनुवाद और पुनर्अनुवाद जैसे कार्यों के लिए अधिकृत किया गया था।जांच एजेंसी का आरोप है कि इन विशेषज्ञों के पास परीक्षा प्रश्नपत्र तक पहुंच थी और उन्होंने गोपनीयता समझौते का उल्लंघन करते हुए प्रश्नों को साझा किया।

होटल में छात्रों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का आरोप

CBI ने अदालत को बताया कि कुछ आरोपियों ने प्रश्नपत्र के सवालों को याद किया या उनकी पर्चियां तैयार कीं।इसके बाद कथित रूप से होटल में बैठकर छात्रों के साथ प्रश्न साझा किए गए। जांच एजेंसी ने इसे परीक्षा की गोपनीयता भंग करने और साजिश का हिस्सा बताया।

79 सवाल पहले ही साझा किए जाने का दावा

CBI ने बताया कि जांच के दौरान जीव विज्ञान और वनस्पति विज्ञान से जुड़े प्रश्नों का विश्लेषण कराया गया।जांच में दावा किया गया कि 90 में से 79 प्रश्न पहले ही साझा किए गए थे। ये प्रश्न परीक्षा के कैलाश सेट से जुड़े थे और परीक्षा में पूछे गए सवाल इसी सेट से संबंधित पाए गए।एजेंसी ने यह भी बताया कि करीब 500 प्रश्न और उनके उत्तर हस्तलिखित व टाइप किए गए रूप में साझा किए गए थे।

भौतिक विज्ञान के प्रश्न लीक होने का भी आरोप

CBI के अनुसार, भौतिक विज्ञान के 68 प्रश्न कथित रूप से लीक हुए थे, जिनमें से 22 प्रश्न परीक्षा में शामिल थे।जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि विषय विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार ने भौतिक विज्ञान के प्रश्नों को याद कर डायरी में लिखा था। मीडिया में मामला आने के बाद कथित तौर पर डायरी नष्ट कर दी गई।

तलाशी अभियान में डिजिटल सामग्री और दस्तावेज बरामद

CBI ने बताया कि मामले की जांच के दौरान महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और अन्य राज्यों में 92 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।इन कार्रवाइयों में डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की गई। एजेंसी ने बताया कि जब्त सामग्री की फोरेंसिक जांच पूरी कर ली गई है।

360 गवाहों और 422 दस्तावेजों को बनाया आधार

CBI ने आरोपपत्र में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक वस्तुओं का उल्लेख किया है।आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, साक्ष्य नष्ट करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम 2024 के तहत भी कार्रवाई की गई है।

13 आरोपी न्यायिक हिरासत में, आगे की सुनवाई पर नजर

अदालत ने 6 अगस्त को सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 10 अगस्त तक बढ़ा दी थी। आरोपियों को चार्जशीट की ई प्रति पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है।अब अदालत 10 अगस्त को यह तय करेगी कि CBI की चार्जशीट पर आधिकारिक रूप से संज्ञान लिया जाए या नहीं। इस फैसले के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!