

रायपुर: ऑनलाइन महादेव सट्टा एप और स्काई एक्सचेंज से जुड़े कथित मनी लांड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। एजेंसी का दावा है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी से अर्जित करोड़ों रुपये की अवैध कमाई को दुबई, मारीशस और यूनाइटेड किंगडम में स्थापित विदेशी कंपनियों के माध्यम से कई स्तरों पर घुमाकर भारत में वैध निवेश के रूप में दिखाया गया।ईडी के अनुसार, इस पूरी वित्तीय संरचना का उद्देश्य धन के वास्तविक स्रोत को छिपाना और उसे कानूनी निवेश का स्वरूप देना था।
हर महीने 450 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई का दावा
जांच एजेंसी का दावा है कि ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क के जरिए हर महीने 450 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की जा रही थी।मामले में कारोबारी विकास गर्ग को 14 जुलाई को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वह 24 जुलाई तक ईडी की रिमांड पर है। एजेंसी विदेशी निवेश, शेल कंपनियों और धन के लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर उससे लगातार पूछताछ कर रही है।
विदेश से संचालित होता था पूरा नेटवर्क
ईडी के मुताबिक, महादेव सट्टा एप और स्काई एक्सचेंज का संचालन विदेशों से संचालित फ्रेंचाइजी आधारित पैनल नेटवर्क के जरिए किया जाता था।जांच में यह भी सामने आया है कि सट्टे से प्राप्त रकम सीधे बैंकिंग प्रणाली से नहीं भेजी जाती थी। इसके बजाय नकद के बदले फर्जी वित्तीय प्रविष्टियां तैयार कराई जाती थीं और फिर शेल कंपनियों के माध्यम से कई चरणों में धन का लेनदेन कर उसकी वास्तविक पहचान छिपाई जाती थी।
दुबई बना मनी लांड्रिंग का प्रमुख केंद्र
ईडी का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में दुबई की भूमिका सबसे अहम रही। अवैध धन पहले दुबई स्थित संस्थाओं तक पहुंचाया जाता था। वहां से मारीशस और यूनाइटेड किंगडम की कंपनियों के जरिए निवेश की पूरी संरचना तैयार की जाती थी।इसके बाद क्यूआईपी, एफपीआई, एफडीआई और एफसीसीबी जैसे वैध निवेश माध्यमों का उपयोग कर विकास गर्ग के नियंत्रण वाली सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में धन निवेश किया जाता था। एजेंसी का दावा है कि इसी प्रक्रिया के माध्यम से काले धन को वैध निवेश का रूप दिया गया।
940 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पहले ही कुर्क
ईडी ने पांच जून को विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों की करीब 940.77 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था।इनमें आवासीय भवन, भूमि, इक्विटी शेयर, प्रतिभूतियां और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियां शामिल हैं।जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में अब तक भारत और विदेशों में स्थित 3800 करोड़ रुपये से अधिक की चल एवं अचल संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी हैं।
जांच लगातार जारी
ईडी का कहना है कि मामले में वित्तीय लेनदेन, विदेशी निवेश और शेल कंपनियों से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है। एजेंसी आगे प्राप्त होने वाले साक्ष्यों के आधार पर अतिरिक्त कार्रवाई कर सकती है।











