छत्तीसगढ़ : बहुचर्चित डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) घोटाले से जुड़े आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के बाद उन्हें नियमित जमानत देने का आदेश दिया है। अदालत का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब इस मामले के मुख्य आरोपी सहित कई अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।

मुख्य आरोपी को मिली राहत का मिला लाभ

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष दलील दी कि इस मामले के मुख्य आरोपी अनिल टुटेजा को 18 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट नियमित जमानत दे चुका है। इसी आधार पर सतपाल सिंह छाबड़ा के लिए भी समान राहत की मांग की गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

क्या हैं जांच एजेंसियों के आरोप?

एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने 16 जनवरी 2024 को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के बाद सामने आए कथित अनियमितताओं के आधार पर की गई थी।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि वर्ष 2019 से सतपाल सिंह छाबड़ा कथित तौर पर DMF के तहत कृषि संबंधी खरीद प्रक्रिया में मध्यस्थ और कमीशन एजेंट के रूप में कार्य कर रहे थे। आरोपों के अनुसार कार्य आदेश दिलाने के बदले वेंडरों से 30 से 35 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा कथित तौर पर स्वयं रखा जाता था और शेष राशि अन्य लोगों तक पहुंचाई जाती थी। जांच में करीब 5 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन का भी उल्लेख किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मामले का ट्रायल पूरा होने में अभी समय लगेगा। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि इस प्रकरण के कुछ अन्य सह-आरोपियों को पहले ही नियमित जमानत मिल चुकी है। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक न्यायिक हिरासत में रखना उचित नहीं माना गया।

इन शर्तों के साथ मिली जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सतपाल सिंह छाबड़ा को निचली अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमानत बांड प्रस्तुत करना होगा। इसके साथ ही उन्हें उन सभी शर्तों का पालन करना होगा, जो इस मामले में पहले जमानत पा चुके अन्य सह-आरोपियों पर लागू हैं।

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