

बिलासपुर : हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 47-ए से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि केवल अनुमान के आधार पर किसी वाहन की जब्ती को वैध नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि जब्ती का आदेश जारी करने से पहले संबंधित अधिकारी के पास ऐसे ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य होने चाहिए, जिनसे यह साबित हो सके कि जब्त किया गया पदार्थ वास्तव में शराब था और उसकी मात्रा कानूनी सीमा यानी पांच बल्क लीटर से अधिक थी।
सेशंस कोर्ट के आदेश को चुनौती देने पहुंचा था मामला
मामला उस स्कॉर्पियो वाहन से जुड़ा था, जिसे छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत कथित रूप से शराब परिवहन में इस्तेमाल होने के आरोप में जब्त किया गया था। पुलिस अधीक्षक रायपुर की रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने धारा 47-ए के तहत वाहन जब्त करने का आदेश दिया था। बाद में वाहन मालिक की अपील भी आबकारी आयुक्त ने खारिज कर दी। इसके बाद मामला न्यायालय पहुंचा।
154 बोतलें जब्त, लेकिन जांच हुई केवल कुछ की
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने देसी शराब, विदेशी शराब और बीयर की कुल 154 बोतलें जब्त करने का दावा किया था। हालांकि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट नहीं हुआ कि सभी बोतलों की वैज्ञानिक या रासायनिक जांच कराई गई थी।
अदालत के अनुसार आबकारी उप निरीक्षक ने केवल 180 मिलीलीटर की आठ क्वार्टर बोतलों और 650 मिलीलीटर की एक बोतल की जांच कराई थी। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 2.09 लीटर सामग्री का ही परीक्षण किया गया था।
एफएसएल रिपोर्ट के अभाव में नहीं लगाया जा सकता अनुमान
हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर न तो फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट थी और न ही किसी रासायनिक परीक्षक या सक्षम अधिकारी का ऐसा प्रमाण, जिससे यह साबित हो सके कि शेष सभी बोतलों में भी शराब ही थी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि बाकी बोतलों की जांच किए बिना यह मान लेना कि सभी 154 बोतलों में शराब थी और उसकी कुल मात्रा पांच बल्क लीटर से अधिक थी, कानून की नजर में स्वीकार्य नहीं है।
ठोस साक्ष्य के बिना जब्ती उचित नहीं
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आबकारी अधिनियम के तहत वाहन जब्त करने जैसी कार्रवाई केवल अनुमान या संभावना के आधार पर नहीं की जा सकती। संबंधित अधिकारी को विश्वसनीय वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह संतुष्ट होना आवश्यक है कि जब्त पदार्थ शराब है और उसकी मात्रा निर्धारित कानूनी सीमा से अधिक है। यदि ऐसे ठोस प्रमाण मौजूद नहीं हैं, तो जब्ती की कार्रवाई टिक नहीं सकती।











