

छत्तीसगढ़ : बहुचर्चित बलौदाबाजार हिंसा मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने आरोपी अमित बघेल की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीर प्रकृति का अपराध बताते हुए सख्त टिप्पणी की है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस एनके व्यास ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपियों ने हजारों की भीड़ को भड़काकर कानून व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया। अदालत के अनुसार इस हिंसा में 7 से 8 हजार लोगों की भीड़ शामिल हुई, जिसने बड़े पैमाने पर हिंसा और आगजनी को अंजाम दिया।कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में, जहां सार्वजनिक शांति और व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया गया हो, वहां जमानत देना उचित नहीं होगा।
10 जून 2024 की घटना से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला 10 जून 2024 को बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में हुए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। बताया गया कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे, जहां मंच से कथित रूप से भड़काऊ भाषण दिए जाने के बाद भीड़ उग्र हो गई।
कलेक्टोरेट और एसपी ऑफिस में हुई तोड़फोड़
उग्र भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़कर कलेक्टोरेट और एसपी कार्यालय परिसर में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। कई वाहनों में आग लगा दी गई और कलेक्टोरेट भवन को भी नुकसान पहुंचाया गया।
करोड़ों की संपत्ति को नुकसान
इस हिंसा में सरकारी और निजी संपत्ति को मिलाकर लगभग 13 से 14 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।





















