कर्नाटक : सियासत में लंबे समय से चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है। कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है, हालांकि उन्होंने साफ कर दिया है कि उनका राजनीतिक सफर खत्म नहीं हुआ है और वे राज्य की राजनीति में सक्रिय रहेंगे।

राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा, राजनीतिक सक्रियता जारी रखने का संकेत

राज्यपाल थावरचंद गहलोत को इस्तीफा सौंपने के बाद सिद्धारमैया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता कर्नाटक की जनता और राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना है।

राष्ट्रीय राजनीति से दूरी, राज्य पर फोकस

सिद्धारमैया ने कहा कि उनकी राष्ट्रीय राजनीति में कोई रुचि नहीं है। वे अपने शेष कार्यकाल तक विधायक के रूप में जनता की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने का फैसला उनकी व्यक्तिगत इच्छा के अनुरूप लिया गया है।

नए मुख्यमंत्री को लेकर बढ़ी चर्चा

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नए मुख्यमंत्री का चयन कांग्रेस आलाकमान और विधायक दल की सहमति से होगा। पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा लंबे समय से चल रही थी, जो अब निर्णायक स्थिति में पहुंच गई है।

डी.के. शिवकुमार के नाम की चर्चा तेज

सूत्रों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद से ही सत्ता संतुलन और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें जारी थीं।

राजनीतिक विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भले ही सिद्धारमैया ने पद छोड़ दिया हो, लेकिन राज्य की राजनीति और कांग्रेस संगठन पर उनका प्रभाव बना रहेगा। दलित, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों में उनकी मजबूत पकड़ पार्टी के लिए अब भी अहम मानी जाती है।अब सभी की नजर कांग्रेस विधायक दल की बैठक पर है, जहां नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।

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