

कोरबा : सोशल मीडिया पर सक्रिय कथित सर्प रेस्क्यू टीमों को लेकर वन विभाग ने लोगों को सतर्क किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिव फाउंडेशन के नाम से प्रसारित हो रही सर्प रेस्क्यू करने वालों की सूची आधिकारिक नहीं है। इस सूची में शामिल किसी भी व्यक्ति को वन विभाग ने मान्यता या रेस्क्यू की अनुमति नहीं दी है।
बिना अनुमति रेस्क्यू करना नियमों के खिलाफ
वन विभाग ने कहा है कि बिना विभागीय अनुमति और प्रशिक्षण के किसी भी व्यक्ति द्वारा सांप या अन्य वन्यजीवों का रेस्क्यू करना कानून के अनुरूप नहीं है। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया की सूची से लोग हो रहे भ्रमित
कोरबा वन मंडल की वनमंडलाधिकारी प्रेमलता यादव ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही सूची से आम लोगों में भ्रम की स्थिति बन रही है। कई लोग उसमें दिए गए मोबाइल नंबरों को वन विभाग की अधिकृत रेस्क्यू टीम समझकर संपर्क कर रहे हैं, जबकि विभाग ने ऐसे किसी भी व्यक्ति को अधिकृत नहीं किया है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर केवल वन विभाग की अधिकृत रेस्क्यू टीम या विभाग के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर ही सूचना दें।
प्रशिक्षण के बिना रेस्क्यू करना हो सकता है खतरनाक
वन विभाग के अनुसार सांप या अन्य वन्यजीवों का रेस्क्यू बेहद तकनीकी और संवेदनशील कार्य है। इसके लिए विशेष प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है। यदि कोई अप्रशिक्षित व्यक्ति रेस्क्यू करने की कोशिश करता है तो इससे वन्यजीव के साथ-साथ आसपास मौजूद लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।
परीक्षा केंद्र में निकला सांप, अधिकृत टीम ने किया सुरक्षित रेस्क्यू
सोमवार को एनसीडीसी स्कूल, सुभाष ब्लाक में आयोजित सूबेदार उप निरीक्षक संवर्ग प्लाटून कमांडर प्रारंभिक परीक्षा के दौरान स्कूल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास एक सांप दिखाई देने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई।स्कूल प्रबंधन ने तुरंत वन विभाग की अधिकृत रेस्क्यू टीम के सदस्य जितेंद्र सारथी को सूचना दी। टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरी सावधानी के साथ सांप को सुरक्षित पकड़ा।
दंड करैत निकला विषहीन सांप
जांच में पता चला कि पकड़ा गया सांप वुल्फ स्नेक यानी दंड करैत था। यह देखने में करैत जैसा दिखाई देता है, लेकिन यह विषहीन प्रजाति का सांप है। रेस्क्यू के बाद वन विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया।
बरसात में बढ़ जाती हैं ऐसी घटनाएं
उपवनमंडलाधिकारी सूर्यकांत सोनी ने कहा कि बारिश के मौसम में सांप और अन्य वन्यजीव अक्सर रिहायशी इलाकों में पहुंच जाते हैं। ऐसी स्थिति में लोगों को घबराने की बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और वन्यजीव को नुकसान पहुंचाने का प्रयास नहीं करना चाहिए।उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में अनधिकृत व्यक्ति से रेस्क्यू नहीं कराना चाहिए। केवल वन विभाग की अधिकृत और प्रशिक्षित टीम को सूचना देने से ही लोगों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।











