CG Police Recruitment: छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी गर्भवती महिला अभ्यर्थियों को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने अपने पहले दिए गए आदेश को वापस लेते हुए स्पष्ट किया है कि गर्भावस्था के कारण शारीरिक दक्षता परीक्षा को स्थगित करने के अधिकार पर अब तक कोई स्पष्ट न्यायिक फैसला नहीं हुआ था। ऐसे में मामले की दोबारा मेरिट के आधार पर सुनवाई की जाएगी।

हाई कोर्ट ने रद्द किया पुराना आदेश

न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने समीक्षा याचिका स्वीकार करते हुए 16 जनवरी 2026 को पारित आदेश को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही संबंधित सभी याचिकाओं को उनके मूल क्रमांक पर बहाल करते हुए विस्तृत सुनवाई के लिए संबंधित पीठ के समक्ष भेजने का निर्देश दिया गया।

2018 की पुलिस भर्ती से जुड़ा है मामला

यह पूरा मामला वर्ष 2018 में शुरू हुई छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। भर्ती के दौरान कई महिला अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली थी, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में देरी के कारण वे शारीरिक दक्षता परीक्षा से पहले गर्भवती हो गईं। उनका कहना था कि इसी वजह से वे पीपीटी में शामिल नहीं हो सकीं और उन्हें परीक्षा स्थगित करने का अवसर मिलना चाहिए।

अदालत ने मानी रिकॉर्ड पर स्पष्ट त्रुटि

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि जिस पुराने फैसले का हवाला देकर याचिकाएं खारिज की गई थीं, उसमें गर्भावस्था के आधार पर पीपीटी स्थगित करने के अधिकार पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं दिया गया था। अदालत ने इसे 'रिकॉर्ड पर स्पष्ट त्रुटि' माना और कहा कि गलत धारणा के आधार पर पारित आदेश को बरकरार नहीं रखा जा सकता।

अन्य महिला अभ्यर्थियों को भी मिलेगा लाभ

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि चूंकि सभी याचिकाएं एक जैसे आदेश के आधार पर खारिज की गई थीं, इसलिए एक याचिकाकर्ता की समीक्षा याचिका स्वीकार होने का लाभ अन्य सभी प्रभावित महिला अभ्यर्थियों को भी मिलेगा। अब सभी मामलों की दोबारा मेरिट के आधार पर सुनवाई होगी, जिसके बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।

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