बलरामपुर: कभी जिस आंगनबाड़ी के लिए किराये की जगह का सहारा लेना पड़ता था, आज उसी गांव के बच्चों के पास अपना भवन है। छत बदली है, तो उसके साथ बच्चों का माहौल भी बदला है। जगह बदली है, तो माताओं का भरोसा भी बढ़ा है। और एक भवन बना है, तो उसके साथ गांव की आने वाली पीढ़ी के लिए उम्मीद का एक नया ठिकाना भी तैयार हुआ है।

कभी किराये के कमरे में संचालित होने वाली आंगनबाड़ी अब अपने स्वयं के भवन में बच्चों के भविष्य की नींव मजबूत कर रही है। पहाड़ों के बीच बसे दूरस्थ गांव के बच्चों के लिए सुरक्षित और सुविधायुक्त आंगनबाड़ी भवन का सपना अब साकार हो चुका है। जनपद पंचायत वाड्रफनगर मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत सरुवत में लंबे समय तक किराये के भवन में संचालित होने वाली आंगनबाड़ी अब अपने स्वयं के नए भवन में संचालित हो रही है। शासन की विभिन्न योजनाओं के अभिसरण और ग्राम पंचायत के प्रयासों से निर्मित इस भवन ने गांव के बच्चों और माताओं के लिए सुविधाओं की नई राह खोली है।
सरुवत में स्थायी आंगनबाड़ी भवन नहीं होने के कारण बच्चों और गर्भवती एवं शिशुवती माताओं को आंगनबाड़ी की सेवाओं का लाभ लेने में असुविधा होती थी। ऐसे में स्थायी भवन की आवश्यकता को प्राथमिकता देते हुए शासन की विभिन्न योजनाओं का संसाधनों का अभिसरण किया गया। वर्ष 2025-26 में विकसित भारत-जी राम जी योजना, 15वें वित्त आयोग और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को एक साथ जोड़कर सरुवत में 11.69 लाख की लागत से नवीन आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत किया गया।

अभिसरण बना गांव की वर्षो पुरानी स्थायी समाधान

भवन निर्माण के लिए विकसित भारत-जी रामजी योजना से 8 लाख, 15वें वित्त आयोग से 1.69 लाख तथा महिला एवं बाल विकास विभाग से 2 लाख की राशि उपलब्ध कराई गई। अलग-अलग योजनाओं के अभिसरण से गांव की वर्षों पुरानी जरूरत का स्थायी समाधान किया गया।

दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बीच समय से पहले बना बच्चों के विकास का सुरक्षित केंद्र

सरुवत का भौगोलिक क्षेत्र पहाड़ी और दुर्गम है। निर्माण सामग्री को भवन स्थल तक पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण था। कठिन रास्तों और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद ग्राम पंचायत ने निर्माण कार्य को प्राथमिकता देते हुए इसे आगे बढ़ाया। निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि नवीन आंगनबाड़ी भवन का निर्माण मार्च 2026 में निर्धारित समय से पहले पूरा कर लिया गया। अब यह भवन केवल बच्चों के बैठने की जगह नहीं, बल्कि उनके पोषण, स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और समग्र विकास के लिए एक सुरक्षित एवं सुविधायुक्त केंद्र बन गया है।

नए आंगनबाड़ी भवन में मिल रहा बेहतर सेवाओं का लाभ

सरुवत की नई आंगनबाड़ी में अब हर दिन बच्चों की चहल-पहल सुनाई देती है। यहां 6 माह से 6 वर्ष तक की उम्र के 47 बच्चे सीखते, खेलते और पोषण संबंधी गतिविधियों में शामिल होते हैं। इनके साथ 9 गर्भवती एवं शिशुवती माताएं भी आंगनबाड़ी की सेवाओं से जुड़ी हैं। इस छोटे से भवन से गांव के बच्चे, गर्भवती एवं शिशुवती माताओं के जीवन में सीधे बदलाव आया है।आंगनबाड़ी कार्यकर्ता  जयमुनी गोंड बच्चों और माताओं के साथ नियमित रूप से जुड़कर उन्हें आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। पहले जहां किराये के भवन में सीमित सुविधाओं के बीच आंगनवाड़ी संचालित होती थी, वहीं अब अपने भवन में बच्चों के लिए सीखने, खेलने और सहज माहौल में समय बिताने की बेहतर जगह है। नया भवन सिर्फ एक छत नहीं, बल्कि गांव के नौनिहालों के लिए ऐसा स्थान बन गया है, जहां पोषण के साथ सीखने और सुरक्षित वातावरण में आगे बढ़ने की शुरुआत होती है। माताएं भी अपने और अपने बच्चों से जुड़ी जरूरी सेवाएं आसानी से प्राप्त कर पा रही हैं।

मां की चिंता हुई कम, बेटी का बचपन हुआ और सुरक्षित

सरुवत की आंगनवाड़ी में आने वाली नन्ही वर्षा की मां  राजमती के लिए नया भवन सिर्फ ईंट-पत्थर से बनी इमारत नहीं है। यह उस मां के मन का सुकून है, जिसे अब अपनी बच्ची को आंगनबाड़ी भेजते समय पहले जैसी चिंता नहीं रहती।राजमती कहती हैं, पहले की तुलना में अब आंगनबाड़ी की सुविधा बहुत अच्छी हो गई है। अब बच्चों को यहां भेजने में किसी तरह की चिंता नहीं रहती। भवन और व्यवस्था दुरुस्त है, बच्चों के लिए सुरक्षित और अच्छा वातावरण मिल रहा है।

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