

बलरामपुर: महादेवपुर की एक वृद्ध महिला किसान बोगी बाई के लिए आज उनके घर की चौखट ही सरकारी सेवा का केंद्र बन गई। उम्र का तकाजा और डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी का अभाव उनके लिए एग्रीस्टैक पंजीयन में बाधा बन सकती थी, लेकिन प्रशासनिक टीम ने इस दूरी को ही खत्म कर दिया। टीम खुद उनके घर पहुंची और मौके पर ही एग्रीस्टैक पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की।
उम्र के इस पड़ाव पर खेती ही उनके जीवन का सहारा है। खेत में उगा धान पूरे साल की उम्मीद है। ऐसे में जब महादेवपुर की बोगी बाई को पता चला कि एग्रीस्टैक में पंजीयन नहीं होने पर डिजिटल क्रॉप सर्वे और कृषि से जुड़ी सुविधाओं का लाभ लेने में परेशानी हो सकती है, तो उनकी चिंता बढ़ गई। मन में सवाल था कि अब धान की बिक्री कैसे होगी और खेती से जुड़ी जरूरी सुविधाओं का लाभ कैसे मिलेगा। लेकिन उनकी इस चिंता का समाधान उन्हें कार्यालय की कतार में नहीं, अपने घर की चौखट पर मिला।
महादेवपुर की वृद्ध महिला बोगी बाई के पास 6.87 हेक्टेयर भूमि है। उम्र अधिक होने के कारण डिजिटल प्रक्रिया उनके लिए चुनौती थी। एग्रीस्टैक पंजीयन नहीं होने से डिजिटल क्रॉप सर्वे और कृषि सुविधाओं से जुड़ने को लेकर उनकी चिंता बढ़ गई थी। टीम ने उनके घर पहुंचकर मौके पर ही प्रक्रिया पूरी की।
किसानों को डिजिटल कृषि व्यवस्था से जोड़ने के लिए कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में डोर टू डोर पंजीयन सुनिश्चित की जा रही है। इसी कड़ी मे रामानुजगंज अनुभाग में डोर-टू-डोर एग्रीस्टैक पंजीयन अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत मैदानी अमला महादेवपुर पहुंचा और वृद्ध महिला किसान के घर जाकर आवश्यक जानकारी जुटाते हुए मौके पर ही एग्रीस्टैक पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की।जिस डिजिटल प्रक्रिया को लेकर महिला किसान के मन में चिंता थी, जब पंजीयन टीम ने उनके घर पहुंचकर पूरी कराई तो उनके चेहरे पर राहत साफ नजर आई। अब उन्हें डिजिटल कृषि व्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिला है और कृषि संबंधी सेवाओं तक पहुंच का रास्ता भी आसान हुआ है।
रामानुजगंज अनुभाग में एग्रीस्टैक पंजीयन को गति देने के लिए डोर-टू-डोर अभियान के तहत किसानों का पंजीयन किया जा रहा है। महादेवपुर में 159 किसानों की संख्या है जिनमे किसानों का पंजीयन किया जा चुका है। बकेटक्लेम में से 49 किसान है जिनका पंजीयन शीघ्र ही पूरा किया जाएगा।
एग्रीस्टैक के माध्यम से किसानों की कृषि संबंधी जानकारी को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, राजस्व अधिकारियों, द्वारा सतत फील्ड में जाकर निगरानी रखी जा रही है। कर्मचारियों एवं एग्रीस्टेक पंजीयन में लगी टीम मैदानी अमला शिविर, डोर-टू-डोर विजिट के माध्यम से घर घर तक पहुंच कर पंजीयन सुनिश्चित कर रही हैइससे डिजिटल क्रॉप सर्वे सहित कृषि योजनाओं और सुविधाओं की पहुंच को अधिक व्यवस्थित एवं सुगम बनाने में मदद मिलेगी। सरकार की डिजिटल व्यवस्था को किसान की सुविधा के अनुरूप बनाया जा रहा है। जहां एक वृद्ध किसान के लिए मोबाइल और ऑनलाइन प्रक्रिया कठिन हो सकती है, वहां शासन-प्रशासन की सुविधा खुद किसान की चौखट तक पहुंच रही ताकि कोई भी किसान सुविधाओं से वंचित न हो











