

नई दिल्ली। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मंगलवार को विमान दुर्घटना की स्थिति पर आधारित मॉक ड्रिल ‘अग्नि चक्र’ का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में विभिन्न एजेंसियों की तैयारियों और समन्वय क्षमता का आकलन करना था।
कई एजेंसियों ने मिलकर किया अभ्यास
इस मॉक ड्रिल में सीआईएसएफ, एआरएफएफ, दिल्ली पुलिस, बीडीडीएस, मेडिकल टीम, एयरलाइंस और अन्य ग्राउंड एजेंसियों के कर्मियों ने हिस्सा लिया। जैसे ही विमान दुर्घटना की सूचना का सिमुलेशन किया गया, सीआईएसएफ की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को सुरक्षित कर लिया।
इसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया तथा घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।
आपात स्थिति से निपटने की क्षमता का परीक्षण
इस अभ्यास के दौरान अंतर एजेंसी संचार व्यवस्था, इमरजेंसी रिस्पॉन्स, घायलों का प्रबंधन और संकट से निपटने की पूरी प्रक्रिया का मूल्यांकन किया गया। अधिकारियों ने इस बात की जांच की कि किसी वास्तविक दुर्घटना की स्थिति में सभी एजेंसियां कितनी तेजी और समन्वय के साथ काम कर सकती हैं।
पहले भी हो चुके हैं बड़े सुरक्षा अभ्यास
इससे पहले 6 अप्रैल को भी आईजीआई एयरपोर्ट पर हाई इंटेंसिटी एंटी हाइजैकिंग मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी, जिसमें सीआईएसएफ, एनएसजी, दिल्ली पुलिस, बीसीएएस, डीजीसीए और डायल जैसी एजेंसियों ने भाग लिया था।
इसके अलावा 30 मार्च को संयुक्त काउंटर टेरर मॉक ड्रिल भी की गई थी, जिसमें आतंकवादी हमले की स्थिति का सिमुलेशन कर सुरक्षा तैयारियों की जांच की गई थी।
देश के अन्य एयरपोर्ट पर भी बढ़ी सुरक्षा तैयारी
सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के अन्य हवाई अड्डों पर भी इसी तरह के सुरक्षा अभ्यास किए जा रहे हैं। अयोध्या, तिरुचिरापल्ली और भुवनेश्वर एयरपोर्ट पर हाल ही में एंटी हाइजैकिंग और आतंकवादी हमले से निपटने की मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने सक्रिय भागीदारी की।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
इन सभी अभ्यासों का उद्देश्य हवाई अड्डों की सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत करना और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।





















