
भोपाल: मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रदेश के चार प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों को UNESCO की Tentative List में शामिल किया गया है। इनमें धार की बाघ गुफाएं, सीहोर का गिन्नौरगढ़ किला, मुरैना का बटेश्वर-ककनमठ-पढ़ावली और विदिशा की उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं।इन स्थलों की खासियत केवल इनकी प्राचीनता नहीं है, बल्कि यहां दिखाई देने वाली वास्तुकला, शिल्पकला, धार्मिक परंपराएं और ऐतिहासिक विरासत भी इन्हें खास बनाती हैं।
UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट तक पहुंचने की दिशा में अहम कदम
भारत की ओर से मध्य प्रदेश के इन चार विरासत स्थलों को UNESCO की Tentative List में शामिल करने के लिए 8 जुलाई 2026 को प्रस्ताव भेजा गया था। Tentative List में शामिल होना किसी स्थल के UNESCO World Heritage List में नामित होने की प्रक्रिया का शुरुआती और महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।भारत की Tentative List में अब तक 78 स्थल शामिल हो चुके हैं। मध्य प्रदेश के इन चार स्थलों के जुड़ने से राज्य की ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक मंच पर आगे ले जाने का रास्ता मजबूत हुआ है।
बाघ गुफाएं: पत्थरों में दर्ज है प्राचीन कला की कहानी
धार जिले में बाघ नदी के किनारे विंध्य क्षेत्र में स्थित बाघ गुफाएं अपनी प्राचीन शैल स्थापत्य और भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां कुल 9 रॉक-कट गुफाओं का समूह है, जिनका निर्माण चौथी से छठी शताब्दी के बीच माना जाता है।इन गुफाओं की दीवारों पर बने चित्र तत्कालीन कला और जीवन शैली की झलक प्रस्तुत करते हैं। चौथी गुफा को रंग महल के नाम से भी जाना जाता है।
गिन्नौरगढ़ किला: गोंड विरासत की अनोखी पहचान
सीहोर जिले के रातापानी क्षेत्र में स्थित गिन्नौरगढ़ किला मध्य प्रदेश की गोंड विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। दुर्ग की प्राकृतिक स्थिति, स्थापत्य और इसकी बनावट इसे दूसरे किलों से अलग पहचान देती है।गिन्नौरगढ़ को स्थानीय स्तर पर तोतों का किला भी कहा जाता है। जंगल और पहाड़ी क्षेत्र के बीच स्थित यह किला इतिहास और प्राकृतिक परिवेश का अनोखा मेल प्रस्तुत करता है।
बटेश्वर-ककनमठ-पढ़ावली: मंदिरों और स्थापत्य का अद्भुत संगम
मुरैना जिले के बटेश्वर, ककनमठ और पढ़ावली ऐतिहासिक स्थापत्य की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थल हैं। बटेश्वर में 100 से अधिक प्राचीन मंदिरों का समूह है, जो अपनी वास्तुकला के लिए जाना जाता है।वहीं ककनमठ की संरचना और मंदिरों पर दिखाई देने वाली बारीक कलाकारी इसे खास बनाती है। पढ़ावली का ऐतिहासिक स्वरूप भी महत्वपूर्ण है और इसकी संरचना में सुरक्षा तथा सैन्य उपयोग से जुड़े तत्व दिखाई देते हैं।
उदयगिरि गुफाएं: एक ही परिसर में कई धार्मिक परंपराओं की झलक
विदिशा के पास स्थित उदयगिरि गुफाएं गुप्तकालीन विरासत का महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। यहां हिंदू परंपरा से जुड़ी शैव और वैष्णव गुफाओं के साथ जैन और बौद्ध प्रभाव से जुड़े अवशेष भी देखने को मिलते हैं।गुफाओं में मौजूद मूर्तिकला इस पूरे परिसर की सबसे बड़ी विशेषताओं में शामिल है। इनमें विशाल वराह प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र है, जो गुप्तकालीन शिल्पकला की उन्नत शैली को दर्शाती है।
अब आगे क्या होगा
Tentative List में शामिल होना इन स्थलों के लिए अंतिम UNESCO दर्जा नहीं है। इसके बाद नामांकन की विस्तृत प्रक्रिया और मूल्यांकन के चरण आते हैं। हालांकि, चारों स्थलों का संभावित सूची में शामिल होना मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।




















