
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित सर्पदंश घोटाला मामले में जेल में बंद कथित लाभार्थी शिवकुमारी साहू को बिलासपुर हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उसे नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की अदालत में हुई।
कोर्ट ने जमानत पर विचार करते हुए मामले में सामने आए तथ्यों, आरोपों की प्रकृति, जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह सांप का काटना दर्ज होने की बात भी अदालत के सामने रखी गई थी।
क्या है सर्पदंश घोटाला मामला?
मामला उन मौतों से जुड़ा है, जिनमें कथित तौर पर सामान्य या अन्य कारणों से हुई मौत को सर्पदंश का मामला बताकर शासन की योजना के तहत आर्थिक सहायता हासिल की गई। इस योजना में पात्र परिवार को चार लाख रुपये की सहायता दिए जाने का प्रावधान बताया गया है।
जांच के दौरान पुलिस ने मामले में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर, कथित तौर पर गिरोह से जुड़े अधिवक्ता और आर्थिक सहायता पाने वाले कुछ लाभार्थियों के खिलाफ भी अपराध दर्ज किया था।
29 जुलाई को गिरफ्तार हुई थी शिवकुमारी
सरकंडा पुलिस ने कबीरधाम जिले के पुटकीकला पांडातराई निवासी करीब 40 वर्षीय शिवकुमारी साहू को 29 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
जमानत याचिका में शिवकुमारी ने खुद को निर्दोष बताते हुए मामले में किसी तरह के फर्जीवाड़े या आर्थिक सहायता हासिल करने में अपनी भूमिका से इनकार किया।
आरोपी ने कोर्ट में क्या दी दलील?
शिवकुमारी की ओर से अदालत में कहा गया कि आर्थिक सहायता सक्षम अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के बाद स्वीकृत की थी। उसके मुताबिक उसने किसी दस्तावेज में फर्जीवाड़ा नहीं किया और न ही योजना के तहत रकम हासिल करने के लिए कोई गलत प्रक्रिया अपनाई।
याचिका में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया, जिसमें मौत का कारण सांप का काटना दर्ज है। इसी आधार पर आरोपी पक्ष ने जमानत दिए जाने की मांग की।
हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए क्या कहा?
हाईकोर्ट ने पाया कि शिवकुमारी 29 जुलाई 2026 से हिरासत में है और उसका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं बताया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों को ट्रायल के दौरान साबित किया जाना बाकी है।
कोर्ट ने माना कि मामले की सुनवाई पूरी होने में समय लग सकता है। ऐसे में लगातार हिरासत में रखने से कोई विशेष लाभ नहीं होगा। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने जमानत आवेदन स्वीकार कर लिया और शिवकुमारी साहू को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
घोटाले की जांच में कई लोगों पर कार्रवाई
इस मामले की जांच के दौरान पुलिस का फोकस केवल आर्थिक सहायता पाने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहा। पोस्टमार्टम प्रक्रिया से जुड़े चिकित्सक और कथित गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
फिलहाल शिवकुमारी साहू को हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिल गई है, जबकि मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।




















