

लखनपुर/ प्रिंस सोनी: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लखनपुर में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों को निशुल्क वितरित की जाने वाली दवाओं के भंडारण और वितरण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में आयरन सिरप, विटामिन-ए और अन्य दवाओं की पेटियां खुले स्थान पर रखी मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, अस्पताल परिसर स्थित मर्चुरी (शवगृह) के बरामदे के पास खुले स्थान पर दवाओं की कई पेटियां रखी हुई थीं। इनमें आयरन सिरप की बड़ी संख्या में बोतलें शामिल थीं। बताया गया कि आयरन सिरप मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं और अन्य लाभार्थियों को दिया जाता है, जबकि विटामिन-ए की दवा 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य के लिए वितरित की जाती है।स्थानीय लोगों और पत्रकारों ने दवाओं की स्थिति पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि मौके पर विटामिन-ए की कुछ दवाएं करीब छह माह से एक्सपायर थीं। वहीं, आयरन सिरप की बोतलों पर वर्ष 2022 की निर्माण तिथि अंकित होने के कारण उसकी वैधता और उपयोग अवधि को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है।
इस मामले की जानकारी मिलने के बाद मीडिया टीम अस्पताल पहुंची। इस दौरान दवा वितरण प्रभारी अमित सिसोदिया द्वारा संबंधित दवाओं को स्टोर रूम में रखवाने की बात सामने आई। आरोप है कि दवाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान एक फार्मासिस्ट ने पत्रकार का मोबाइल छीन लिया। इस घटना को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।दवा वितरण प्रभारी अमित सिसोदिया ने बताया कि आयरन सिरप एक्सपायर नहीं हुआ है और उसकी वैधता वर्ष 2027 तक है। उनके अनुसार, सिरप को वितरण के उद्देश्य से बरामदे के पास रखा गया था। उन्होंने यह भी कहा कि छत से पानी टपकने के कारण कुछ दवाओं पर अंकित मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपायरी और बैच नंबर धुंधले या मिट गए हो सकते हैं।
वहीं, बीएमओ डॉ. ओ.पी. प्रसाद ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं के भंडारण के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है, इसलिए वितरण के लिए सिरप की पेटियां बरामदे के पास रखी गई थीं। वर्ष 2022 में निर्मित आयरन सिरप की एक्सपायरी अवधि के सवाल पर उन्होंने कहा कि दवा की वैधता कंपनी द्वारा निर्धारित अवधि के अनुसार होती है और रिकॉर्ड देखने के बाद ही स्पष्ट जानकारी दी जा सकती है।मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि दवाएं वैध और वितरण योग्य हैं, तो उन्हें खुले स्थान पर रखने के बजाय निर्धारित मानकों के अनुसार सुरक्षित भंडारित क्यों नहीं किया गया। वहीं, यदि कुछ दवाएं एक्सपायर हो चुकी थीं, तो उनका समय पर पृथक्करण और नियमानुसार निस्तारण क्यों नहीं किया गया।
अस्पताल परिसर में खुले स्थान पर रखी दवाओं तक बच्चों की पहुंच होने की बात भी सामने आई है। इससे दवाओं की सुरक्षा और किसी अप्रिय घटना की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दवाओं की वास्तविक स्थिति, एक्सपायरी रिकॉर्ड, भंडारण व्यवस्था और वितरण प्रक्रिया की जांच करने की मांग की है।











