बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में मंगलवार को स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। जनसुनवाई के दौरान उन्होंने ज्ञापन सौंपते हुए खाद्यान्न वितरण संचालकों के कमीशन में बढ़ोतरी, समय पर भुगतान और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान महिलाएं अपने साथ राशन वितरण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें भी लेकर पहुंचीं।

कमीशन घटाने का लगाया आरोप

श्री आईजी स्वयं सहायता समूह, बिलवा रोड की अध्यक्ष रजनी आर्य ने बताया कि आजीविका मिशन के तहत समूहों को राशन दुकानों का संचालन सौंपा गया है। उनका कहना है कि पहले प्रति दुकान 10 हजार रुपये कमीशन मिलता था, जिसे घटाकर 8 हजार रुपये कर दिया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में इसे और कम किया जा सकता है।

25 हजार रुपये मासिक कमीशन की मांग

महिलाओं ने मांग की कि खाद्यान्न वितरण संचालकों का मासिक कमीशन बढ़ाकर 25 हजार रुपये किया जाए। साथ ही प्रत्येक संचालक को 3 हजार रुपये प्रतिमाह सहायक भत्ता देने की व्यवस्था की जाए। ज्ञापन में प्रत्येक समूह को स्थायी भवन या गोदाम उपलब्ध कराने और कमीशन का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की भी मांग की गई।

कम कार्डधारकों वाली दुकानों के लिए अलग व्यवस्था

महिलाओं ने कहा कि जिन राशन दुकानों में कार्डधारकों की संख्या कम है, वहां संचालकों की आय भी प्रभावित होती है। ऐसे मामलों में कमीशन बढ़ाने और खाद्यान्न वितरण से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की गई। उन्होंने समूहों के हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक नीतिगत निर्णय लेने का भी आग्रह किया।

व्यक्तिगत खाते में भुगतान की मांग

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि वर्तमान में कमीशन की राशि समूह के खाते में जमा होती है। इसे संबंधित खाद्यान्न विक्रेता के व्यक्तिगत बैंक खाते में सीधे जमा करने की व्यवस्था की जाए, ताकि भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बन सके।

बीमा योजना लागू करने की मांग

महिलाओं ने खाद्यान्न विक्रेताओं के लिए व्यापक बीमा योजना लागू करने की भी मांग की। प्रस्तावित योजना में दुर्घटना में मृत्यु पर बीमा राशि, स्थायी या आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में आर्थिक सहायता, गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए स्वास्थ्य बीमा तथा ड्यूटी के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को शामिल करने की बात कही गई। उन्होंने यह भी मांग की कि बीमा प्रीमियम का पूरा या आंशिक खर्च सरकार वहन करे, क्योंकि खाद्यान्न विक्रेता सार्वजनिक वितरण प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!