

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धमतरी जिले के 14 शिक्षकों द्वारा दायर क्रमोन्नति वेतनमान संबंधी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर पहले ही डिवीजन बेंच द्वारा फैसला दिया जा चुका है, इसलिए उसी के अनुरूप वर्तमान याचिकाओं में अलग से राहत देने का कोई आधार नहीं बनता।
न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने भुवन लाल बैस, संजय कुमार साहू, मितेश कुमार पाल, लीला राम साहू, लक्ष्मी साहू सहित 14 शिक्षकों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। अदालत ने कहा कि सभी मामलों में तथ्य और कानूनी प्रश्न समान हैं, इसलिए उनका एक ही आदेश से निराकरण किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड में पदस्थ शिक्षक, सहायक शिक्षक और व्याख्याता (एलबी) हैं। उन्होंने राज्य शासन के 10 मार्च 2017 के परिपत्र के आधार पर क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ देने की मांग की थी। विभाग द्वारा मांग अस्वीकार किए जाने के बाद शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से बताया गया कि इसी प्रकार का विवाद पूर्व में "स्मृति आभा नामदेव एवं अन्य बनाम राज्य शासन" प्रकरण में तय किया जा चुका है। उस मामले में हाईकोर्ट ने 13 मार्च 2026 को दिए गए "पुष्पलता माणिकपुरी एवं अन्य बनाम राज्य शासन" के फैसले का अनुसरण करते हुए कहा था कि संबंधित कर्मचारी "स्मृति सोना साहू" प्रकरण के कर्मचारियों जैसी परिस्थितियों में नहीं हैं, इसलिए उन्हें 10 मार्च 2017 के परिपत्र का लाभ नहीं दिया जा सकता।
अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में असफल रहे कि उनकी स्थिति उन कर्मचारियों के समान है, जिन्हें पूर्व में राहत प्रदान की गई थी। ऐसे में 10 मार्च 2017 के परिपत्र के तहत क्रमोन्नति वेतनमान का दावा विधिसम्मत नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सभी 14 रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया।









