अलनीनो के संभावित असर को लेकर जहां प्रदेश में जल संकट की आशंकाएं जताई जा रही हैं, वहीं धमतरी जिले का गंगरेल बांध राहत का संकेत दे रहा है। महानदी पर निर्मित यह बांध छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा और सबसे लंबा बांध माना जाता है तथा रायपुर-दुर्ग संभाग की सिंचाई और पेयजल व्यवस्था की रीढ़ है। वर्तमान में बांध में उपयोग योग्य जल भंडार 11.703 टीएमसी दर्ज किया गया है, जो इसकी उपयोगी क्षमता का 43.21 फीसदी है।

प्रदेश के सबसे बड़े बांध की खासियत

करीब 1830 मीटर लंबे गंगरेल बांध की ऊंचाई नदी तल से 30.5 मीटर है। इसका जलाशय लगभग 83 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। बांध की कुल जल भंडारण क्षमता 32.150 टीएमसी है, जबकि उपयोगी जल संग्रहण क्षमता 27.079 टीएमसी निर्धारित की गई है। मौजूदा जलस्तर को देखते हुए जल संसाधन विभाग फिलहाल स्थिति को संतुलित मान रहा है।

टीएमसी का क्या होता है मतलब

जल संसाधन विभाग के अनुसार 1 टीएमसी का अर्थ एक हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी होता है। इसे लीटर में बदलें तो यह लगभग 2831.6 करोड़ लीटर पानी के बराबर होता है। इस हिसाब से गंगरेल बांध अपनी पूरी क्षमता पर करीब 910 अरब लीटर से अधिक पानी संग्रहित कर सकता है।

436 तालाबों और लाखों लोगों की जरूरत पूरी करता है बांध

गंगरेल बांध केवल खेतों की सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि धमतरी और बालोद जिले के 436 तालाबों को भी इसी से पानी उपलब्ध कराया जाता है। हर साल अप्रैल और मई की भीषण गर्मी में महानदी मुख्य नहर और उसकी सहायक नहरों के जरिए तालाबों को भरा जाता है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और दैनिक उपयोग के पानी की कमी न हो। आवश्यकता के अनुसार रायपुर और बलौदाबाजार तक भी इसी बांध से जलापूर्ति की जाती है।

लाखों हेक्टेयर खेती को मिलता है जीवन

गंगरेल बांध की वार्षिक सिंचाई क्षमता करीब 12.39 लाख हेक्टेयर बताई जाती है। खरीफ सीजन में यह लगभग 2.64 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि और रबी सीजन में करीब 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई करने में सक्षम है। धमतरी, रायपुर, बालोद और बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के बड़े हिस्से की खेती इसी परियोजना पर निर्भर है।

2019 में संकट के समय किसानों का बना था सहारा

गंगरेल बांध पहले भी कठिन परिस्थितियों में किसानों के लिए उम्मीद की किरण साबित हो चुका है। वर्ष 2019 में मानसून की देरी और कैचमेंट क्षेत्र में कम बारिश के कारण जुलाई और अगस्त की शुरुआत तक बांध में केवल 21 फीसदी पानी बचा था। हालात ऐसे बन गए थे कि कई जिलों में फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई थीं।

आपात फैसला लेकर छोड़ा गया था पानी

स्थिति गंभीर होने पर जल संसाधन विभाग ने 17 अगस्त 2019 को आपात निर्णय लेते हुए 507 क्यूसेक पानी छोड़ा था। रूद्री बैराज के माध्यम से यह पानी महानदी मुख्य नहर से सूखा प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाया गया, जिससे किसानों की फसलों को राहत मिली। बाद में अगस्त के अंतिम सप्ताह और सितंबर में अच्छी बारिश होने से बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ा और सिंचाई के साथ पेयजल संकट भी काफी हद तक टल गया।

मौजूदा जल भंडार से बढ़ी उम्मीद

अलनीनो की आशंकाओं के बीच गंगरेल बांध में उपलब्ध 43 फीसदी उपयोगी जल भंडार फिलहाल राहत देने वाला माना जा रहा है। यदि आने वाले दिनों में सामान्य बारिश होती है तो सिंचाई और पेयजल आपूर्ति को लेकर स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।

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