

भिलाई। दुर्ग जिला चिकित्सालय में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित 20 वर्षीय युवती दीपिका गाड़ा की मौत के मामले में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने सिविल सर्जन सहित कुल नौ स्वास्थ्यकर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को दो दिनों के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
इलाज के दौरान हुई थी युवती की मौत
जानकारी के अनुसार, सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित दीपिका गाड़ा को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उसे तत्काल रक्त की आवश्यकता बताई गई थी। परिजनों का आरोप है कि समय पर पर्याप्त रक्त उपलब्ध नहीं हो पाया और इलाज में भी देरी हुई, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। बाद में उपचार के दौरान युवती की मौत हो गई।घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों और स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई थी और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
चार दिन चली जांच, कई पहलुओं की हुई पड़ताल
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर विस्तृत जांच शुरू की गई। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज दानी और एडीएम योगिता देवांगन ने लगातार चार दिनों तक अस्पताल में जांच की। इस दौरान मरीज के उपचार से जुड़े दस्तावेज, ड्यूटी रिकॉर्ड, रक्त उपलब्धता की स्थिति और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा की गई।जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी गई, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई है।
सिविल सर्जन समेत 9 कर्मचारियों से मांगा स्पष्टीकरण
जांच रिपोर्ट में उपचार प्रक्रिया और रक्त प्रबंधन व्यवस्था को लेकर कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता बताई गई है। इसके बाद सिविल सर्जन आशीष मिंज, शनि, तृप्ति, निखिल अग्रवाल, तीन स्टाफ नर्स और दो लैब टेक्नीशियन सहित कुल नौ स्वास्थ्यकर्मियों को नोटिस जारी किया गया है।नोटिस में पूछा गया है कि मरीज के उपचार के दौरान उनकी क्या जिम्मेदारी थी और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं समय पर उपलब्ध क्यों नहीं हो सकीं।
लापरवाही साबित हुई तो होगी विभागीय कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी कर्मचारियों से प्राप्त जवाबों का परीक्षण किया जाएगा। यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही, कर्तव्य में कमी या उपचार संबंधी चूक सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
परिजनों ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग
मृतका के परिजनों का कहना है कि यदि समय पर रक्त और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जातीं, तो दीपिका की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ अस्पताल की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और रक्त प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।





















