भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया है। निर्वाचन अधिकारी द्वारा लिए गए इस फैसले के बाद विधानसभा परिसर में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खुशी जाहिर करते हुए जश्न मनाया। बताया जा रहा है कि भाजपा की ओर से दर्ज आपत्ति के बाद नामांकन की जांच की गई और उसके बाद यह निर्णय लिया गया।

स्पेशल फ्लाइट को बीच रास्ते से लौटाया गया

नामांकन रद्द होने की खबर मिलते ही कांग्रेस विधायकों को लेकर रवाना हुआ विशेष विमान वापस भोपाल एयरपोर्ट बुला लिया गया। विमान उड़ान भर चुका था, लेकिन बाद में उसे लौटाकर लैंड कराया गया। इसके बाद सभी विधायक एयरपोर्ट से बाहर निकल गए।

हलफनामे में जानकारी छिपाने का आरोप बना विवाद की वजह

भाजपा ने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष लिखित आपत्ति प्रस्तुत करते हुए दावा किया था कि कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन ने तेलंगाना में चल रहे एक कानूनी मामले की जानकारी अपने चुनावी हलफनामे में शामिल नहीं की। इसी आधार पर नामांकन को निरस्त करने की मांग की गई थी।

विधायकों की बाड़ेबंदी की रणनीति भी हुई बेअसर

कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरु ले जाने की तैयारी भी चर्चा में रही। जानकारी के मुताबिक विमान को पहले डीजीसीए के नियमों और सुरक्षा संबंधी औपचारिकताओं के कारण रोका गया था। करीब चार घंटे बाद उड़ान को मंजूरी मिली और विमान रवाना हुआ, लेकिन नामांकन रद्द होने के बाद यह पूरी कवायद राजनीतिक रूप से निष्प्रभावी हो गई।

जानिए पूरा मामला और घटनाक्रम

मामले की शुरुआत 11 मई 2025 को हुई घटना से जुड़ी बताई जा रही है। इसके बाद 20 अगस्त 2025 को शिकायतकर्ता ए. श्रीलता ने हैदराबाद की फोर्थ एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में मीनाक्षी नटराजन सहित अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दायर की थी। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।

17 सितंबर 2025 को अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए मीनाक्षी नटराजन को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

इसके बाद 24 अक्टूबर 2025 को उनकी ओर से अदालत में जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया, जिसमें आरोपों को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए शिकायत को खारिज करने की मांग की गई।

हालांकि 17 नवंबर 2025 को अदालत ने मामले को समाप्त करने के बजाय सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला किया था और मामला अभी भी न्यायिक विचाराधीन बताया जा रहा है।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल

नामांकन खारिज होने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है, जबकि भाजपा इसे अपनी आपत्ति की वैधता और कानूनी प्रक्रिया की जीत के रूप में पेश कर रही है। अब सभी की नजरें कांग्रेस की अगली रणनीति और संभावित कानूनी कदमों पर टिकी हैं।

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