खंडवा। मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर अब सरकार पर अपनी मांगों को लेकर दबाव बढ़ा रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को खंडवा जिला अस्पताल के बाहर डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों की प्रमुख मांग है कि उनका मासिक स्टाइपेंड 14 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये किया जाए। इस आंदोलन को अब जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन यानी जूडा का भी समर्थन मिल गया है।

दो महीने से जारी आंदोलन, डॉक्टरों ने सरकार पर लगाया अनदेखी का आरोप

प्रदर्शन में शामिल डॉ राहुल सोनारके ने कहा कि डॉक्टरों का आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग की।

उनका कहना है कि आंदोलन को करीब दो महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से न तो कोई ठोस आश्वासन मिला है और न ही प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के साथ बातचीत की गई है। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन और अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।

भोपाल की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल

डॉ राहुल सोनारके ने भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। डॉक्टरों ने इस मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है।

मांग पूरी नहीं हुई तो राहुल गांधी के कार्यक्रम को समर्थन देने की बात

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने यह भी कहा है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो वे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कार्यक्रम का समर्थन करेंगे।

राहुल गांधी के 19 सितंबर को इंदौर पहुंचने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। वहां वे छात्रों से जुड़े 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को संबोधित करने वाले हैं। ऐसे में इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन और इस राजनीतिक कार्यक्रम के बीच संभावित समर्थन को लेकर भी चर्चा तेज हो सकती है।

इंटर्न डॉक्टरों के साथ खड़ा हुआ जूडा

इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन के समर्थन में अब जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन भी सामने आ गया है। गांधी मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टरों ने 7 सितंबर 2026 को स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सीएम हाउस की ओर मार्च किया था।

डॉक्टरों का आरोप है कि उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज के साथ वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद जूडा ने प्रदर्शनकारी इंटर्न डॉक्टरों के समर्थन में आंदोलन को व्यापक करने का फैसला लिया।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी और गैर इमरजेंसी सेवाओं पर असर

जूडा ने विरोध स्वरूप प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी और गैर इमरजेंसी सेवाएं बंद रखने का निर्णय लिया है। हालांकि गंभीर मरीजों को राहत देने के लिए इमरजेंसी सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है।

इंटर्न डॉक्टरों और जूडा के एक साथ आंदोलन में आने से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है। अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम और डॉक्टरों की मांगों पर होने वाली बातचीत पर टिकी है।

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