नई दिल्ली: कथित वोट चोरी को लेकर विपक्ष के चुनाव आयोग पर लगातार हमलों और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग के बीच निर्वाचन आयोग ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यों का नए सिरे से आवंटन किया है। इस प्रक्रिया में डीजी आईटी सीमा खन्ना समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों को लेकर नया आदेश जारी किया गया है।इंडिया ब्लॉक लंबे समय से सीमा खन्ना और मुख्य चुनाव आयुक्त पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों में शामिल होने का आरोप लगाता रहा है। विपक्षी दल सीमा खन्ना को उनके पद से हटाने की मांग भी कर रहे हैं।
सीमा खन्ना को DECs स्तर के अधिकारी को रिपोर्ट करने का निर्देश
निर्वाचन आयोग की ओर से बुधवार को जारी कार्य आवंटन आदेश के मुताबिक, डीजी आईटी सीमा खन्ना को अब DECs स्तर के अधिकारी को रिपोर्ट करनी होगी। आईटी और शिकायतों से जुड़े कार्यात्मक विभागों की फाइलें भी उन्हें संबंधित अधिकारी को सौंपनी होंगी।हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने गुरुवार को ETV भारत को बताया कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हुआ है, लेकिन इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए। अधिकारियों के मुताबिक, आयोग समय-समय पर इस तरह कार्य आवंटन करता है। यह आदेश चुनाव आयोग के सर्वसम्मति से लिए गए फैसले के आधार पर जारी किया गया है।
आयोग का दावा- सीमा खन्ना की रिपोर्टिंग व्यवस्था में बदलाव नहीं
सीमा खन्ना की जिम्मेदारियों को लेकर उठ रहे सवालों पर आयोग के सूत्रों ने कहा कि डीजी आईटी की रिपोर्टिंग व्यवस्था में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, खन्ना पहले से ही DECs स्तर के अधिकारी को रिपोर्ट करती रही हैं।SIR के दौरान ड्राफ्ट सूची से नाम गायब होने पर आयोग की नई सफाई अधिकारियों के कार्य आवंटन से जुड़ा आदेश ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले ही निर्वाचन आयोग ने SIR के तहत मतदाता सूची में नाम शामिल कराने को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया था।आयोग ने कहा था कि जिस मतदाता का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, उसे अंतिम मतदाता सूची में शामिल होने के लिए नए सिरे से आवेदन करना होगा। यह नियम उन लोगों पर भी लागू होगा, जिनका नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज रह चुका है।चुनाव आयोग के संज्ञान में आया था कि SIR के दौरान प्रकाशित मसौदा सूची में नाम नहीं मिलने के बाद कई पुराने मतदाता फॉर्म-6 जमा करने से हिचक रहे हैं। इसकी वजह फॉर्म के साथ दी जाने वाली घोषणा है, जिसमें यह बताना होता है कि मतदाता का नाम पहली बार सूची में शामिल किया जा रहा है।ऐसे मतदाताओं को आशंका है कि पहले से मतदाता सूची में नाम होने के बावजूद फॉर्म-6 जमा करने पर उन्हें गलत घोषणा करने का जिम्मेदार माना जा सकता है। इससे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई या अभियोजन की स्थिति बन सकती है।
फॉर्म-6 की घोषणा 2022 से लागू, पात्र मतदाताओं को आवेदन की सलाह
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में निर्धारित घोषणा 1 अगस्त 2022 से लागू है। इसलिए जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं हैं, वे तय प्रक्रिया के अनुसार फॉर्म-6 भरकर अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।आयोग ने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता अंतिम सूची से बाहर न रह जाए। रामलीला मैदान की रैली में विपक्ष ने लिया था आंदोलन जारी रखने का संकल्पगौरतलब है कि रविवार को इंडिया ब्लॉक ने दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली के दौरान कथित वोट चोरी के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया था। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी दोहराई थी।










