
India Pakistan Conflict: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में आतंकी ढांचे के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस सैन्य कार्रवाई के दौरान कई आतंकी ठिकानों और रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। अब अभियान को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने एक अहम स्पष्टीकरण दिया है, जिसके बाद पाकिस्तान के किराना हिल्स इलाके को लेकर चल रही चर्चाओं को नया संदर्भ मिला है।
किराना हिल्स को लेकर क्या स्पष्ट किया गया
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेनाओं की रणनीति केवल आतंकी हमलों का जवाब देने तक सीमित नहीं थी। अभियान का मकसद दुश्मन की सैन्य और आतंकी क्षमता को नुकसान पहुंचाना तथा महत्वपूर्ण ढांचे पर सटीक प्रहार करना था।किराना हिल्स का नाम ऑपरेशन के बाद सामने आया था और इसे लेकर कई तरह के दावे किए गए। खासतौर पर इस क्षेत्र में कथित परमाणु प्रतिष्ठान को निशाना बनाए जाने की अटकलें भी लगाई गईं। हालांकि, पूर्व CDS ने इन दावों को स्पष्ट रूप से खारिज किया।
क्या भारतीय सेना ने किराना हिल्स पर हमला किया था
पूर्व CDS के अनुसार भारतीय सेनाओं ने किराना हिल्स या वहां स्थित किसी परमाणु प्रतिष्ठान को लक्ष्य बनाकर हमला नहीं किया था। उनके मुताबिक, भारतीय अभियान के दौरान लक्ष्य की तलाश में भेजा गया एक लोइटरिंग म्यूनिशन संभवत: निर्धारित लक्ष्य नहीं मिलने के बाद किराना हिल्स की पहाड़ियों से टकरा गया।इस घटना के बाद इलाके से धुआं उठता दिखाई दिया था। पाकिस्तानी मीडिया में धुएं से जुडी तस्वीरें और दृश्य सामने आने के बाद किराना हिल्स को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हुआ था।
ऑपरेशन की रणनीति पर भी आया स्पष्टीकरण
पूर्व CDS ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर की योजना व्यापक सैन्य रणनीति के तहत तैयार की गई थी। भारतीय पक्ष ने ऐसे लक्ष्यों की पहचान पर ध्यान दिया जिन पर कार्रवाई से दुश्मन की सैन्य क्षमता और आतंकी ढांचे को प्रभावी नुकसान पहुंचाया जा सके।इससे यह संकेत मिलता है कि अभियान को केवल प्रतीकात्मक जवाबी कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा गया था, बल्कि इसके पीछे लक्ष्य आधारित सैन्य योजना भी थी।
बयान के बाद फिर चर्चा में आया ऑपरेशन सिंदूर
पूर्व CDS के स्पष्टीकरण के बाद ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत द्वारा पाकिस्तान में बनाए गए लक्ष्यों और कार्रवाई के वास्तविक दायरे को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है। किराना हिल्स से जुडी अटकलों पर स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद अभियान में किन रणनीतिक ठिकानों को किस स्तर तक निशाना बनाया गया था, इसे लेकर कई सवाल अब भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।




















