इंदौर। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के धार्मिक स्वरूप का निर्धारण करने को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ में शुक्रवार को भी सुनवाई जारी रही। याचिकाकर्ता अंतर सिंह की ओर से अधिवक्ता एके चितले ने तर्क रखे।

शुक्रवार की सुनवाई में एडवोकेट चितले ने कहा कि पूरी भोजशाला विवादित नहीं है, कुछ हिस्सा ही विवादित है। एएसआइ के आदेश के बाद से यहां मंगलवार को पूजन और शुक्रवार को नमाज हो रही है। इससे किसी को तकलीफ नहीं होती है। परेशानी तब होती है जब बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ जाती है तब धार्मिक सौहार्द खतरे में आ जाता है।

भोजशाला को लेकर चार याचिकाएं और एक अपील पर हाई कोर्ट में छह अप्रैल से एक साथ नियमित सुनवाई हो रही है। एडवोकेट चितले शनिवार को तर्क पूरे करेंगे। कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि शनिवार को एडवोकेट चितले की बहस पूरी होने के बाद कोर्ट इंटरविनर और इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को सुनेगी।एएसआइ की ओर से पैरवी कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने कहा कि वह सभी पक्षकारों के तर्क पूरे होने के बाद अंत में अपनी बात रखना चाहते हैं।

इस पर कोर्ट ने कहा कि एएसआइ ने कोर्ट के आदेश पर भोजशाला का सर्वे किया है। आपको अपनी रिपोर्ट रखनी है और सर्वे में क्या मिला यह कोर्ट को बताना है। सभी पक्षकार एएसआइ की सर्वे रिपोर्ट का हवाला दे रहे हैं इसलिए हम आपको सुनना चाहते हैं।

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